1962 के युद्ध में देश के खिलाफ थे ये वामपंथी और अब CCP के 100 साल का जश्न भी मना रहे हैं

0
49
communism
Image: Rashtrahit Media

साल 1921 में माओत्से तुंग ने जिस पार्टी की नींव रखी थी| उस पार्टी को अस्तित्व में आए अब 100 साल पूरे हो चुके हैं| हम बात कर रहे हैं चाइनीस कम्युनिस्ट पार्टी की जो सबसे लंबे समय से जीवित पार्टी रही है| अब वह अपने 100 साल पूरे होने का जश्न मना रही है| चीन ‘एक पार्टी’ राज्य है जिसके चलते चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) इतिहास की सबसे सफल कम्युनिस्ट पार्टी रही है|

अपने देश के विभिन्न उपलब्धियों का प्रदर्शन करते हुए चीन जश्न मनाना चाह रहा है| दूसरी सबसे बड़ी सेना के साथ दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दिखावा करना चाह रहा है| अपनी तरक्की का दिखावा कर चीन 100 साल पूरे होने का जश्न मनाना चाह रहा है|

करोना काल में इतनी आबादी के मरने के बाद भी चीन पार्टी के 100 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है जैसे इतने नुकसान का उसे कोई अफसोस ही नहीं है|

चीन की बढ़ती ताकत भारत के साथ-साथ अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस जैसे कई ताकतवर देशों के सामने एक चुनौती के रूप में आ खड़ा है| इस बात से तो सभी अवगत हैं कि चीन सबसे ताकतवर देश बनना चाहता है जिसके लिए वह कुछ भी कर सकता है| इसी बात को लेकर अन्य देशों के लिए चीन एक चुनौती बन गया है|

दूसरे देशों की तो बात ही छोड़ो चीन के खुद के नागरिक अपनी मर्जी से नहीं रह सकते हैं| 100 सालों से राज कर रही पार्टी ने बेशक खुद को आजाद देश घोषित कर दिया था लेकिन इसके नागरिक आज भी सीसीपी के नियंत्रण में जी रहे हैं| सरकार के खिलाफ बोलने की वहाँ किसी को कोई आजादी नहीं है और यदि कोई बोलता भी है तो उसकी आवाज को दबा दिया जाता है| सब कार्य चीन में सरकार की मर्जी से होते हैं यहाँ तक कि वहां के नागरिक इंटरनेट पर भी वही देखते हैं जो सरकार उन्हें दिखाना चाहती है|अन्य देशों समेत भारत की नीतियों का वहाँ मजाक उड़ाया जाता है| इस सब के बावजूद पाकिस्तान, रूस और उत्तरी कोरिया जैसे देश पूरी मजबूती के साथ चीन का साथ देते हैं|

यह भी पढ़ें : दुनिया भर की तमाम रिसर्च Covid को Chinese Virus ही मानती हैं

चीन की भारत के खिलाफ रणनीतियाँ :

100 साल से राज कर रही चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के भारत के साथ कोई खास अच्छे संबंध नहीं रहे हैं, ना ही चीन की हरकतें देखकर उससे संबंध ठीक किया जा सकता है| अभी कुछ समय पहले भारत में दूसरी लहर के चलते काफी मौतें हुई एक बार फिर महामारी ने देश को हिला कर रख दिया| देश की यह हालत देखकर चीन को जैसे मौका मिल गया, एक अकाउंट के द्वारा चीन ने इंटरनेट पर दूसरी लहर को लेकर भारत का मजाक उड़ाने का मौका नहीं छोड़ा| अपने देश में चल रहे नए अंतरिक्ष अभियान की तस्वीर से भारत में चल रही चिताओं की तस्वीर से तुलना करते हुए लिखा कि एक तरफ चीन में लगी आग और दूसरी तरफ भारत में लगी आग| इतनी नाजुक हालातों का भी चीन मजाक उड़ाने से पीछे नहीं हटा| हाँलाकि यह तस्वीर इंटरनेट से अगले दिन हटा ली गई लेकिन भारत को नीचा दिखाने का चीन का मकसद पूरा हो गया|

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को दो भागों में बांटने की चीन की सालों पुरानी साजिश :

इन 100 सालों में विश्व स्तर पर चीन ने काफी दरारें डालीं, लेकिन उसे संतुष्टि नहीं मिली, काफी साल पहले वह भारत के अंदर पार्टी में भी दरार डालने में सफल हुआ| यह बात 1962 की है जब लंबे वक्त तक चीन और भारत के बीच तनाव के बाद युद्ध हुआ था| इस युद्ध का कारण 3 साल पहले 1959 में चीन सेना का भारत के केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल(CRPF) के 10 जवानों की हत्या थी जिसके बाद दाेनाें देशों में तनाव पैदा हुआ और युद्ध को अंजाम मिला| जिसमें भारत जीत नहीं पाया और हार के बाद भारत सरकार में तनाव की स्थिति पैदा हो गई|

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया में तनाव इतना बढ़ गया था कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं, वह समझ नहीं पा रहे थे कि अपने देश के प्रति कार्यों को चुनें या अपने वामपंथ के विषैले विचार को| इस बीच रूस ने भारत की मदद करने की सोची और सीपीआई से चीन से युद्ध में प्रधानमंत्री द्वारा तैयार की गई नीतियों का समर्थन करने के लिए कहा| इसके बाद एक तरफ कुछ नेता तो नेहरु का साथ दे रहे थे लेकिन दूसरी तरफ कुछ भारतीय कम्युनिस्ट नेता चाइना का साथ देने लगे थे| सब अलग हो गए यहाँ तक कि जब नेहरू ने चीनी सैनिकों के देश में घुस जाने की बात बताई तब भी सीपीआई ने कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखाई| उल्टा वामपंथी नेता नेहरु के द्वारा कही गई बात का सच ना होने का दावा करने लगे|

इस सबके चलते भारत की जनता को सीपीआई पार्टी को लेकर संदेह होने लगा, सीपीआई पार्टी जनता के विश्वास को खोने लगी| हालांकि जब 1962 में भारत पर हमला हुआ तब एसए डांगे ने उन नेताओं की गिरफ्तारी में नेहरू की मदद की जो चीन का सहयोग कर रहे थे| लेकिन 1964 में चीन के समर्थक नेताओं ने अपनी पार्टी बना ली| इसी तरह चीन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया को दो भागों में बांटने में सफल रहा| इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए यह कहा जा सकता है कि चीन में ऐसा कुछ नहीं बचा है जिससे उस पर भरोसा किया जा सके| भारत और चीन के संबंध खराब होने के पीछे चीन के साजिशों का बड़ा हाथ है|    

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here