रामदेव के इन सवालों के जवाब एलोपैथी के पास हैं क्या ?

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Image: Rashtrahit Media

अभी हाल ही में योगगुरु स्वामी रामदेव ने एलोपैथिक दवाओं पर विवादित बयान देने के बाद चर्चा में आए जिसके बाद उन्हें काफ़ी ट्रोल किया गया। ट्रोल तो सब ने किया लेकिन ये नहीं सोचा कि योगगुरु की बातों में कितना दम है और इतनी दवाओं के बावजूद भी लाखों लोग मर गए और अभी भी आंकड़े दिन प्रतिदिन बढ़ ही रहे हैं। यह अलग बात है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के हस्तक्षेप पर वह ऐलोपैथी पर अपनी टिप्पणी वापस ले चुके हैं।

उन्होंने आईएमए से 25 सवालों के जवाब भी मांगे जो निम्नवत हैं-

स्वामी रामदेव रोजाना सुबह लगभग 4:30 से 7:00 बजे तक पतंजलि योगपीठ और अन्य जगहों से अपने भक्तों को योग की क्रियाए सिखाते हैं। इसी दौरान बाबा रामदेव वीडियो में कहते सुनाई दे रहे हैं कि 1000 से ज्यादा डॉक्टर कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगाने के बाद मर गए हैं। जो अपने आपको ही नहीं बचा पाए वो कैसी डॉक्टरी। वो डॉक्टर (टर्र-टर्र कहकर) शब्द का मजाक भी बना रहे हैं।

स्वामी रामदेव डॉक्टरों पर तंज कसते हुए ये जरूर कहते सुनाई दे रहे हैं कि डॉक्टर बनना है तो स्वामी रामदेव जैसा बनो, जिसके पास कोई डिग्री नहीं है लेकिन वो फिर भी सबका डॉक्टर है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो का हवाला देते हुए भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने कहा था कि रामदेव ने दावा किया है कि एलोपैथी मूर्खतापूर्ण विज्ञान है और भारत के औषधि महानियंत्रक द्वारा कोविड-19 के इलाज के लिए मंजूर की गई रेमडेसिविर, फेवीफ्लू तथा ऐसी अन्य दवाएं बीमारी का इलाज करने में विफल रही हैं।

रामदेव की तरफ से IMA को पूंछे गए 25 सवाल

आईएमए के अनुसार, रामदेव ने कहा कि एलोपैथी दवाएं लेने के बाद लाखों की संख्या में मरीजों की मौत हुई है। भारतीय चिकित्सा संघ ने रामदेव के बयान को अज्ञानता भरी टिप्पणी करार दिया था और मांग की थी कि कथित रूप से लोगों को भ्रमित करने और एलोपैथी दवाओं को मूर्खतापूर्ण विज्ञान बताने के लिए योगगुरु बाबा रामदेव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रामदेव को पत्र लिखकर विवादित बयान वापस लेने को कहा था। जिसके बाद बाबा रामदेव ने डॉ हर्षवर्धन को पत्र लिखकर और ट्विटर पर अपने बयान के लिए माफी भी मांगी।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने बाबा रामदेव को ढोंगी और पाखंडी भी बताया। क्या सच में रामदेव पाखंडी है? क्या उन्होंने कभी किसी का शोषण किया? कभी उन्होंने किसी से दुर्व्यवहार किया हो? यदि ऐसा नहीं है तो उन्हें ढोंगी और पाखंडी क्यों कहा जा रहा है?

यदि बाबा रामदेव ने मेडिकल साइंस पर सवाल उठाए हैं या सोशल मीडिया पर जिस तरह से मेडिकल साइंस फ़ेल होने की बात की जा रही है तो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को इसका जवाब ज़रूर देना चाहिए और मेडिकल साइंस को इतना आगे तक ले जाना चाहिए कि कोई भी न उसपे सवाल उठा पाए और न ही किसी बाबा, या करेले, लौकी, नीम जैसी चीजें खाके अपनी मर्जों को सही करना पड़े।

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कितना लाभकारी है आयुर्वेद-

अब बात करते हैं कि कितना फायदेमंद है आयुर्वेद। हम अपने पूर्वजों से सुनते आए हैं कि नीम की पत्तियां, करेले, हरी सब्जियां, कई पेड़ों की छाल, उनके पत्ते, तने, जड़ें आदि काफी लाभकारी होती हैं, जो बीमारी से बचने और उनसे लड़ने की क्षमता को बढ़ाती हैं। ऐसी ही एक दवाई कोरोनिल जो बाज़ार में आई थी जो पतंजलि का ही एक प्रोडक्ट है जिसके प्रयोग से लोगों का इम्यून सिस्टम सही रहता है। कुछ समय पहले लोगों में इसके प्रयोग को लेकर काफी सकारात्मकता देखने को मिली। जिन लोगों ने इसका उपयोग किया उन्होंने इसे इम्यून सिस्टम को सही रखने में कारगर बताया, जबकि एलोपैथी इम्यून सिस्टम को खराब करती है।

हालांकि बाबा रामदेव ने जो डॉक्टर्स के लिए बयान दिया वो गलत था जिसके लिए उन्होंने माफी भी मांगी। यह तो हम सभी मानते हैं कि एलोपैथी किसी भी बीमारी में इंस्टेंट लाभ पाने के लिए अच्छा है परंतु उसके साइड इफेक्ट्स भी हैं। वहीं यदि बात आयुर्वेद की हो तो लोग जल्द ही विश्वास कर लेते हैं। बड़े बुजुर्गों का कहना है कि यदि किसी बीमारी की शुरुआत है या कुछ छोटी-मोटी बीमारी है उसमें आयुर्वेदिक दवाइयों का प्रयोग करना चाहिए।

आयुर्वेद का इतिहास :

आयुर्वेद का इतिहास एक समृद्ध अतीत से भरा हुआ है, समृद्ध है और पुरातनताओं में गहराई से बैठा है। वेदों में आयुर्वेद नामक एक शाखा भी शामिल है जिसका अर्थ है “जीवन का विज्ञान”। इस प्रकार आयुर्वेद की यात्रा सबसे पुरानी और समग्र उपचार पद्धति के रूप में शुरू हुई।

आयुर्वेद की उत्पत्ति :

भारत में आयुर्वेद का मूल धर्म, हिंदू धर्म जितना पुराना है। इन पुस्तकों को चार वेदों के रूप में जाना जाता है; ऋग्वेद, साम वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद। आयुर्वेद, अथर्ववेद से जुड़ा एक उप खंड था और इसे ऋग्वेद के उपवेद के रूप में माना जाता है और अथर्ववेद के अंतःवेद (आंतरिक भाग) के रूप में माना जाता है। आयुर्वेद का इतिहास यह दावा करता है कि इस उप खंड ने बीमारियों, चोटों, असुरक्षा, पवित्रता और स्वास्थ्य और जीवन के सभी रहस्यों, स्वस्थ रहने के तरीकों, ऋग्वेद में बताए गए रोगों से बचाव के तरीके बताए। ऋग्वेद त्रिदोषों पर चर्चा करता है – वात, पित्त और कफ और विभिन्न जड़ी बूटियों का उपयोग रोगों को ठीक करने के लिए। पंचभूत, सृष्टि के पांच तत्व – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, ब्रह्माण्ड जो ब्रह्माण्ड का आधार बनते हैं, वे भी समस्त सृष्टि का आधार हैं – यह आयुर्वेद का बहुत ही सार है जिसमें त्रिगुण नामक आयुर्वेदिक ज्ञान के तीन पहलू हैं। -सूत्र जिसमें बीमारी, बीमारी के लक्षण और उपचार शामिल हैं।

आयुर्वेद के महापुरूष :

आयुर्वेद का इतिहास इस प्राचीन विज्ञान की खगोलीय उत्पत्ति की ओर भी संकेत करता है, जो कभी भारतीय संतों और ऋषियों को सूचित किया गया था। मिथकों से पता चलता है कि धन्वंतरि, जिन्होंने बाद में आयुर्वेद को लिखा था, उन्होंने इसे ऋषियों को पढ़ाया था। एक अन्य किंवदंती के अनुसार, चिकित्सा का ज्ञान भगवान ब्रह्मा से उत्पन्न हुआ, जिन्होंने इसे राजा दक्ष को सिखाया, जिन्होंने आगे भगवान इंद्र को सिखाया।

यह बेचैनी का समय था जब बीमारी और मौत कहर ढा रही थी और मानव के पास कोई जवाब नहीं था। यह वह समय था जब इस समस्या का हल खोजने के लिए सभी महान संत एकत्रित हुए। इस बैठक के दौरान ऋषि भारद्वाज आगे आए और उन्होंने भगवान इंद्र से आयुर्वेद के प्राचीन विज्ञान को सीखा। फिर उन्होंने ऐतरेय को यह विज्ञान पढ़ाया, जिन्होंने इस ज्ञान को पूरी दुनिया में पहुँचाया। आयुर्वेद का इतिहास बताता है कि बाद में, यह अग्निवेश था, आत्रेय के शिष्यों ने ‘अग्निवेश संहिता’ लिखा था जिसे आज भी आयुर्वेद का सबसे व्यापक रूप माना जाता है और वर्तमान समय मे आयुर्वेद का सबसे व्यापक बिज़नेस और योग का भंडार रखने का श्रेय योगगुरू बाबा रामदेव को माना जाता है।

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