ये UP है, यहाँ झूंठ का एजेंडा नहीं चलता

अब्दुल की वीडियो तो असली है पर बयान गलत है

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ghaziabad viral video
Image: Rashtrahit Media

सोशल मीडिया पर कई बार, कई वीडियोज़ हिन्दू मुस्लिम के नाम पर, लिंचिंग के नाम पर वायरल हो रही होती हैं। जो वीडियोज़ में तो कुछ और दिखती हैं लेकिन उनके पीछे की असलियत कुछ और ही होती है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक मुस्लिम बुजुर्ग अब्दुल समद ने चार अज्ञात लोगों पर गाजियाबाद में सुनसान पड़े एक मकान में ले जाकर उसे ”जय श्रीराम” का नारा लगाने के लिए मजबूर करने, पिटाई करने और दाढ़ी काटने का आरोप लगाया है।

जान बचानी है या दाढ़ी :

पीड़ित अब्दुल समद के मुताबिक, आरोपियों के पास कैंची भी थी। एक युवक ने दाढ़ी काटने के लिए कैंची लाने के लिए कहा तो उन्होंने आरोपियों के हाथ जोड़कर दाढ़ी न काटने की गुहार लगाई। इसपर आरोपियों ने कहा कि उन्हें जान प्यारी है या दाढ़ी। इस पर वह बेबस हो गए और युवकों ने कैंची से दाढ़ी काटनी शुरू कर दी। उन्होंने विरोध किया तो युवकों ने उनके साथ फिर से मारपीट शुरू कर दी।

तीन साथियों को बैठाकर दौड़ाया ऑटो:

पीड़ित का कहना है कि रास्ते में तीन साथियों को बैठाने के बाद चालक ऑटो को रांग साइड में दौड़ाने लगा। कारण पूछने पर चालक ने कहा कि आगे पुलिस चेकिंग कर रही है, उसी से बचने को थोड़ी दूर रांग साइड चलना है। पीड़ित के मुताबिक इसके बद आरोपियों ने जबरदस्ती कपड़े से उनकी आंखें ढक दीं और मारपीट करते हुए सुनसान जगह ले गए।

पुलिस का बयान:

वहीं, पुलिस मामले को सांप्रदायिक नहीं बल्कि ताबीज से जुड़ा हुआ बता रही है। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि पुलिस इस मामले को किसी भी सांप्रदायिक कोण होने से इनकार करते हुए कहा कि सूफी अब्दुल समद पर छह लोगों – हिंदुओं और मुसलमानों द्वारा हमला किया गया था – जो उनके द्वारा बेचे गए ताबीज से नाखुश थे। 

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित पाठक ने बताया कि उनके अलावा पोली, आरिफ, मुशाहिद और परवेश गुर्जर भी घटना में शामिल थे। उन्होंने कहा कि इस बुजुर्ग आदमी ने तांत्रिक साधना की और कुछ ताबीज गुर्जर को बेच दिए, कथित तौर पर उनके परिवार के एक सदस्य को किसी “बुरे प्रभाव” से मुक्त करने के लिए, लेकिन दोनों के बीच विवाद पैदा हो गया क्योंकि ताबीज का कोई परिणाम नहीं निकला।

पुलिस ने पहले गुर्जर को गिरफ्तार किया था, जो उस घर का मालिक है जहां कथित घटना हुई थी। 5 जून को हुई इस घटना के दो दिन बाद आईपीसी की धारा 342, धारा 323, धारा 504, धारा 506 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने बताया कि समद ने अपनी शिकायत में यह उल्लेख नहीं किया कि उनकी दाढ़ी काट दी गई थी और उन्हें ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर किया गया था। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण इराज राजा ने कहा कि पुलिस अन्य आरोपियों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है और उन्हें जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

ट्विटर पर राजनीतिक घमासान:

इस वीडियो के वायरल होने के बाद इसने राजनीतिक तूल पकड़ लिया जिसके बाद ट्विटर पर कई नेताओं आम आदमियों ने इसपर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।

  • कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा कि “मैं ये मानने को तैयार नहीं हूं कि श्रीराम के सच्चे भक्त ऐसा कर सकते हैं। ऐसी क्रूरता मानवता से कोसों दूर हैं। राहुल गांधी ने ट्वीट में कहा है कि यह समाज और धर्म दोनों के लिए शर्मनाक है।”
  • सीएम योगी ने ट्वीट कर राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि “प्रभु श्रीराम की पहली सीख है- सत्य बोलना, जो आपने जीवन में कभी किया नहीं। शर्म आनी चाहिए कि पुलिस की ओर से सच्चाई बताए जाने के बाद भी आप समाज में जहर फैलाने में लगे हैं। सत्ता के लालच में मानवता को शर्मसार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता को अपमानित करना, उन्हें बदनाम करना छोड़ दें।
  • ट्वीट अरफा खानुम शेरवानी की तरफ से किया गया जिसमें उन्होंने पुलिस और प्रशासन पर सवाल किए।

गौरतलब यह है कि पुलिस के बयान जारी करने के बाद भी कुछ लोग इस बात से मुंह मोड़ रहे हैं और वो इसमें सिर्फ हिंदू मुस्लिम कर रहे हैं उनका मानना है कि अगर “जय श्री राम” के नारे कोई भी लगवाकर लिंचिंग करता है तो वह हिन्दू है और अगर पुलिस प्रूव करने की कोशिश करे तो वह झूठ है।

एक सवाल कि आखिर कब तक इस तरह से हम एक दूसरे को सिर्फ कटघरे में खड़ा करते रहेंगे और कब तक “जय श्री राम” और अल्लाह के नाम पर लड़ते रहेंगे?

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