अपनों में ही खंजर भोंपने वाला मेहुल चौकसी |

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Image: Rashtrahit Media

भारत आज अगर सोने की चिड़िया नहीं है तो इसमें कुछ भारतीय ही हैं जिन्होंने भारत माँ को लूटने में कसर नहीं छोड़ी और अंग्रेजों के समय मे भी ऐसे ही लोग रहे होंगे जिन्होंने अपनों की ही पीठ पर छुरे भौंपे और भारत को गरीबी की दहलीज़ पर लाकर खड़ा कर दिया। जब थोड़ी हालत सम्भली तब तक भगोड़े मेहुल चौकसी जैसे कुछ और लोग देश को खोखला करने लगे। जिसे डोमिनिका में गिरफ़्तार कर लिया गया है।

भारत से फरार हीरा कारोबारी और पंजाब नेशनल बैंक घोटाले का आरोपी भगोड़ा मेहुल चोकसी डोमिनिका में गिरफ्तार हो गया है। वहां से कुछ फोटोज़ वायरल हो रहे हैं। जिसमें वह पुलिस कस्टडी में नज़र आ रहा है। उसके हाथ पर चोट के निशान भी दिख रहे हैं।

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कैरेबियाई राष्ट्र एंटीगुआ से लापता होने के बाद इस सप्ताह की शुरुआत में मेहुल चोकसी को डोमिनिका में पकड़ लिया गया था।

वह 13,500 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले का कथित मास्टरमाइंड है। मेहुल चोकसी ने वकीलों के हवाले से कहा है कि उसका 23 मई, 2021 को भारत के लिए काम कर रहे लोगों और एंटीगुआ के अधिकारियों ने अपहरण कर लिया है। उसे इस दौरान पीटा गया, प्रताड़ित किया गया और एक जहाज के जरिए डोमिनिका ले जाया गया, जहां उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

हालांकि एंटीगुआ के अधिकारियों ने इस बात से साफ इंकार किया है उन्होंने कहा कि न ही मेहुल का अपहरण किया गया है और न ही प्रताड़ित किया गया, उसे गिरफ़्तार किया है। एंटीगुआ के प्रधानमंत्री के मुताबिक भारतीय अधिकारी, दस्तावेजों के रूप में सबूतों के साथ डोमिनिका पहुंच गए हैं, जिससे वहां ये साबित हो सके कि मेहुल चोकसी एक गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी का आरोपी है और उसे भारत भेज दिया जाना चाहिए।

मेहुल चोकसी के कथित अपहरण, यातना और अवैध गिरफ्तारी का मामला डोमिनिकन हाई कोर्ट के सामने लंबित है। अदालत ने मेहुल चोकसी के किसी अन्य देश में प्रत्यर्पण पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 2 जून को होगी। दूसरी तरफ भारत डोमिनिका से मेहुल चोकसी को सीधे भारत वापस लाने की संभावनाएं तलाश रहा है।

कौन है मेहुल चौकसी ?

मेहुल चोकसी का जन्म सूरत में हुआ था। वो ठेठ गुजराती था| उसके पिता भी हीरे का काम करते थे। यह काम उसने बचपन से ही घर में देखा था। अन्य लोगों की तरह वह भी हीरे का काम करता था। लेकिन वह एक मामूली गुजराती दुकानदार के बजाय एक बड़ा व्यापारी बनना चाहता था। इसलिए मेहुल चोकसी ने 1986 में गीतांजलि जेम्स के नाम से अपना ब्रांड शुरू किया। उस समय उसकी उम्र केवल 26 वर्ष थी। उसने बिना पॉलिश के हीरों को बेचना और पॉलिश करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, मेहुल ने बेल्जियम, अमेरिका, जापान, चीन, हांगकांग और थाईलैंड को हीरे भेजना शुरू किया, जिससे काफी मुनाफा हुआ।

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मेहुल ने अपने भांजे नीरव मोदी के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक में करीब 13,500 करोड़ रुपये का निवेश किया था। दोनों देश की आंखों में धूल झोंककर भारत से भाग निकले। एक समय था जब मेहुल हीरे जैसे बेशकीमती रत्न को सूरत की गलियों में आम हीरा व्यापारियों की तरह पहनता था और 26 साल की उम्र में उसने करोड़ों की संपत्ति बना ली थी। उसके भांजे नीरव मोदी ने भी इस काम में मदद की।

जब मेहुल चोकसी हीरे के कारोबार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा था, उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार का विस्तार करने के लिए भांजे नीरव की मदद ली। बता दें कि नीरव पहले बेल्जियम में रह रहा था, लेकिन वहां कारोबार में कामयाब नहीं हो सका इसलिए, नीरव मोदी 1999 में भारत लौट आया। उसने भारत में अपने मामा मेहुल से संपर्क किया। इस मामा-भांजे की जोड़ी ने मिलकर पैसा कमाने का प्लान बनाया। दोनों ने रिटेल मार्केटिंग पर फोकस बढ़ाया। 1994 में, मेहुल के लोकप्रिय ब्रांड गीतांजलि ने गिल्ली नामक एक खुदरा ब्रांड भी लॉन्च किया।


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