इनकम टैक्स रिटर्न को लेकर है उलझन तो यहां समझें आपको ITR दाखिल करना है या नहीं

इनकम टैक्‍स (Income Tax) का भुगतान करना और इनकम टैक्‍स रिटर्न (ITR) दाखिल करना दो अलग-अलग चीजें हैं. इसलिए लोगों को इसे एक नहीं समझना चाहिए. दोनों ही चीजों के नियम और प्रकिया अलग-अलग है. यहां हम आपको कुछ ऐसी बातें बता रहे हैं, जिने आईटीआर भरने या नहीं भरने को लेकर आपकी ऊहापोह दूर करने में मदद मिलेगी...

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देश में ज्‍यादातर नौकरीपेशा लोग आयकर रिटर्न (Income Tax Return) दाखिल करने को लेकर उलझन में फंसे रहते हैं. उन्‍हें ये ही स्‍पष्‍ट नहीं हो पात है कि उनके लिए आईटीआर (ITR) दाखिल करना जरूरी है भी या नहीं. बता दें कि टैक्‍स (Income Tax) का भुगतान करना और आईटीआर दाखिल करना दो अलग-अलग चीजें हैं. इसलिए लोगों को इसे एक नहीं समझना चाहिए. दोनों ही चीजों के नियम और प्रकिया अलग-अलग है. यहां कुछ बिंदु दिए गए हैं, जो आपके आईटीआर भरने या नहीं भरने की ऊहापोह को दूर करने में मदद करेंगे.

मूल छूट सीमा से अधिक कुल आय
अगर किसी व्यक्ति की कुल आय निवेश और खर्च में कटौती के विभिन्‍न विकल्पों का लाभ उठाने के मुकाबले मूल छूट सीमा से अधिक है तो उसे आईटीआर दाखिल करना होगा. ऐसे में आयकर कानून की धारा-80 सी, 80 सीसीडी, 80 डी, 80 टीटीए, 80 टीटीबी के तहत कटौती का लाभ उठाया जा सकता है. बता दें कि कटौती विकल्प होम लोन, जीवन बीमा प्रीमियम, स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, ईपीएफ, पीपीएफ, एनपीएस खातों में योगदान, बैंकों से ब्याज, बच्चों के लिए ट्यूशन शुल्क के पुनर्भुगतान के लिए उपलब्ध है.

अलग मामलों छूट की सीमा अलग

जो लोग 60 वर्ष से कम आयु के हैं, वे हर साल 2.5 लाख रुपये की छूट सीमा के तहत आते हैं. चहीं, 60 से अधिक और 80 से कम उम्र के लोगों को प्रति वर्ष 3 लाख रुपये तक की आय कर टैक्‍स से छूट मिलती है. इसके अलावा 80 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए यह छूट 5 लाख रुपये प्रति वर्ष है. कभी-कभी ऐसा होता है कि विभिन्‍न कटौती के आवेदन के बाद आय 2.5 लाख से नीचे आ जाती है. ऐसे मामलों में छूट की सीमा से इतर सकल आय होने के बावजूद टैक्‍स का भुगतान करने की जरूरत नहीं होती है.

दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ के मामले में आईटीआर

सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और इक्विटी ओरिएंटेड यूनिट्स की बिक्री पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ आकलन वर्ष 2019-2020 के लिए कर मुक्त था, लेकिन लोगों को अभी भी आईटीआर दाखिल करने की जरूरत है. बता दें कि इस मामले में छूट धारा-10 (38) के तहत दी गई थी. मान लीजिए कि इस देश का नागरिक कर दायरे में नहीं आता है, लेकिन उसे देश के बाहर की संपत्ति में ब्याज मिल रहा है तो उसे आईटीआर दाखिल करना होगा. इसके अलावा अगर उस व्यक्ति के पास देश के बाहर किसी भी खाते के संबंध में हस्ताक्षर के अधिकार हैं तो भी उसे आईटीआर दाखिल करना होगा. यह उन लोगों पर भी लागू होता है जो भारत के बाहर किसी बैंक में हस्ताक्षरकर्ता हैं .

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