ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा पर देश और दुनिया का रिएक्शन

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delhi tractor rally

नए कृषि कानूनों के विरोध में गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा का असर आज किसान आंदोलन पर भी देखा जा रहा है। बीते करीब दो महीने से नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल पर डटे भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) से जुड़े किसानों की संख्या आज अन्य दिनों के मुकाबले काफी कम है। इसके साथ ही यहां आज एक भी ट्रैक्टर नहीं दिख रहा है।

जानकारी के अनुसार, किसान संगठनों की केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के पक्ष में मंगलवार को हजारों की संख्या में किसानों ने ट्रैक्टर परेड निकाली थी। इस दौरान कई जगह प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के बैरिकेड्स को तोड़ दिया और पुलिस के साथ झड़प की, वाहनों में तोड़फोड़ की और लाल किले पर एक धार्मिक ध्वज निशान साहिब लगा दिया था।

लाल किले की घटना की जांच हो : टिकैत

किसान नेता राकेश टिकैत ने लाल किला परिसर में भीड़ के घुसने और धार्मिक झंडा फहराने की घटना की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हिंसा के पीछे कुछ असामाजिक तत्व थे। टिकैत ने कहा कि ऐसा करने वाले लोगों का किन राजनीतिक दलों और व्यक्तियों से संबंध था इसकी जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों से लाल किला जाने का आह्वान नहीं किया था, वे पहले से निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि परेड के लिए पहले से तय कुछ मार्गों की घेराबंदी की गई थी, जिसकी भी जांच कराई जानी चाहिए।

टिकैत ने कहा कि जिस किसी ने भी पुलिस कर्मियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया उनकी पहचान की जानी चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। किसान संगठनों और पुलिस के बीच समझौते के बाद गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी में किसान परेड निकालने पर सहमति बनी थी। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन शांतिपूर्ण प्रदर्शन में विश्वास करती है और हिंसा के पीछे उपद्रवियों की पहचान करेगी।

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को किसान ट्रैक्टर परेड के दौरान काफी लोग ट्रैक्टर के साथ लाल किला परिसर में घुस गए थे और वहां एक धार्मिक झंडा फहराया था और तोड़फोड़ की थी। किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने तथा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देने की मांग को लेकर 63 दिनों से राजधानी की सीमाओं पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों के ट्रैक्टर परेड के दौरान राजधानी दिल्ली में हिंसा हो गई। इस दौरान आंदोलित भीड़ में से कुछ लोग लाल क़िले के भीतर घुस गए और क़िले की प्राचीर पर सिखों के धार्मिक झंडे निशान साहब को लगा दिया। इस हिंसक झड़प में एक किसान की मृत्यु भी हुई वहीं बहुत से किसान घायल हुए जिसका इल्ज़ाम दिल्ली पुलिस पर लगाया जा रहा है। हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने अबतक 22 एफआईआर दर्ज किए हैं। परेड के दौरान किसान और पुलिस में हिंसक झड़पें हुई जिसमें 83 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। कम से कम 20 ट्रैक्टर लाल क़िले के भीतर घुसे थे। इसके बाद लाल क़िले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इनके अलावा लाल क़िला, जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर एंट्री बंद कर दी गई है।

वहीं तनावपूर्ण हालात को देखते हुए हरियाणा के तीन ज़िलों में शाम 5 बजे तक टेलीकॉम सेवाएं बंद कर दी गई है।

गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी में भड़की हिंसा को लेकर विदेशी मीडिया ने सरकार की कड़ी आलोचना की है।

द न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि “भारतीय किसानों का प्रदर्शन मोदी के लिए चुनौती बन गया है।” अख़बार ने लिखा, “हज़ारों प्रदर्शनकारी किसानों ने मंगलवार को भारत की राजधानी नई दिल्ली में प्रदर्शन किया। ट्रैक्टर से उन्होंने बैरिकेड्स हटा दिए। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे जिससे अराजकता फैल गई। यह सरकार को सीधी चुनौती है।”

द वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा, “गुस्साए किसानों ने नई दिल्ली में हज़ारों ट्रैक्टर चलाए।” अख़बार ने लिखा, “पुलिस ने कई जगहों पर आंसू गैस के गोले दागे और पानी की तेज धार छोडी। किसानों ने ट्रैक्टर से कंक्रीट और लोहे के बैरिकेड को हटा दिया। पुलिस अधिकारियों ने किसानों को राजधानी के केन्द्र तक पहुंचने से रोकने की कई कोशिशें की। कंटेनरों और बसों से सड़क जाम कर दिए गए थे।”

बीबीसी वर्ल्ड ने लिखा है, कि भारी प्रदर्शन में पुलिस के साथ भिड़े किसान।

बीबीसी ने लिखा, ‘कृषि सुधारों के विरोध में हज़ारों किसानों ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में प्रवेश किया। इस दौरान किसानों ने बैरिकेड्स हटा दिए और उनपर आंसू गैस के गोले दागे गए। कई प्रदर्शनकारी तय रास्तों से अलग हो गए और रास्ते में पुलिस के साथ झड़पें हुई।’

अलजज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, “राजधानी में किसानों की रैली के दौरान भारतीय पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया।”

अख़बार ने लिखा, ‘राजधानी नई दिल्ली में दसियों हज़ार भारतीय किसानों की रैली हिंसक हो गई, पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया गया। किसानों ने शहर में प्रवेश के लिए बैरिकेड्स तोड़ दिए। किसान पिछले साल नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पारित तीन कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं।’ द गार्डियन ने लिखा कि भारत में नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने राजधानी दिल्ली के चारों तरफ लगाए गए बैरिकेड्स तोड़ दिए और शहर के ऐताहिसक लाल क़िले में घुस गए। अराजकता और हिंसा गणतंत्र दिवस समारोह पर भारी पड़ गया। पुलिस ने मंगलवार को राजधानी में मार्च कर रहे किसानों पर लाठी-डंडों के साथ आंसू गैस के गोले दागे। हिंसा में एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए।’

वहीं ब्लूमबर्ग ने किसान आंदोलन को लेकर एक ओपीनियन पीस लिखा है जिसमें कहा गया है कि ‘भारत के मोदी को खेती पर स्थिर रहना चाहिए।’ ब्लूमबर्ग ने लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में छटपटाहट दिख रही है लेकिन उन्हें स्थिर रहना चहिए। उनके बदलावों से किसान आंदोलन पर उतर आए हैं। बदलाव पहले की तुलना में भारतीय कृषि की सबसे अचूक समस्याओं को दूर करने वाले हैं। उन बदलावों को संरक्षित करने की ज़रूरत है, त्यागने की नहीं।’

साथ ही कई नेताओं ने भी गणतंत्र दिवस मौके पे हुई इस हिंसक वारदात को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश ने यादव ने ट्रैक्टर परेड हिंसा के लिए बीजेपी को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने जिस तरह किसानों की लगातार उपेक्षा की, उसी वजह से किसानों की नाराजगी आक्रोश में बदली।

अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा है कि ‘बीजेपी सरकार ने जिस प्रकार किसानों को निरंतर उपेक्षित, अपमानित व आरोपित किया है, उसने किसानों के रोष को आक्रोश में बदलने में निर्णायक भूमिका निभायी है। अब जो हालात बने हैं, उनके लिए बीजेपी ही कसूरवार है। बीजेपी अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए कृषि-कानून तुरंत रद्द करे।

मायावती ने ट्रैक्टर रैली में उपद्रव की निंदा की

दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर रैली में हिंसा को बसपा प्रमुख मायावती ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। मायावती ने बुधवार सुबह ट्वीट कर कहा कि देश की राजधानी दिल्ली में कल गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की हुई ट्रैक्टर रैली के दौरान जो कुछ भी हुआ, वह कतई भी नहीं होना चाहिए था। यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण तथा केन्द्र की सरकार को भी इसे अति-गंभीरता से ज़रूर लेना चाहिए।

इसी बीच किसानों ने कुछ न्यूज़ चैनल और वीडिओज़ के माध्यम से बताया है कि आखिर उन्होंने किसके कहने पर ये सब किया जिसमें दीप सिद्धू और लाखा सिधाना दो नाम हैं जो कि काफ़ी सुर्खियों में है।

जानकारी के मुताबिक दीप सिद्धू और लाखा सिधाना ने ही किसानों को लाल किला पर जाने के लिए भड़काया। लाल किले पर पहुंचने के बाद दीप सिद्धू ने ही प्रचार पर निशान साहिब फहराने के लिए भी कहा। इस बात को सिद्धू ने एक फेसबुक वीडयो में कुबूल भी किया है।

कौन है लाखा सिधाना ?

लाखा सिधाना

पंजाब के भटिंडा का रहने वाला लाखा सिधाना अपराध की दुनिया का बड़ा नाम है। इसके ऊपर कई केस चल रहे हैं और पहले कई मामलों में गिरफ्तारी भी हो चुकी है। लाखा सिधाना का असली नाम लखबीर सिंह सिधाना है और वो कबड्डी का अच्छा खिलाड़ी था लेकिन अपराध दुनिया मं पैर रखने के बाद उसने अपना नाम और शौक दोनों को छोड़ दिया। लाखा सिधाना अभी युवाओं को सरकार और सिस्टम के खिलाफ भड़काने का काम करता है और सिधाना चुनाव भी लड़ना चाहता है।

कौन है दीप सिद्धू?

दीप सिद्धू

दीप सिद्धू मुक्तसर में जन्मे पंजाबी अभिनेता और फिल्म निर्माता हैं। किंग फिशर मॉडल हंट जीतने के बाद सिद्धू सुर्खियों में आए और बाद में ग्रेसिम मिस्टर पर्सनालिटी और ग्रेसिम मिस्टर टैलेंटेड भी बने। मॉडलिंग की दुनिया को छोड़ उन्होनें सहारा इंडिया परिवार के साथ एक कानूनी सलाहकार के रूप में काम करना शुरू कर दिया। साथ ही साढ़े तीन साल तक बालाजी टेलीफिल्म्स के कानूनी सलाहकार भी रहे।

सिद्धू ने 2019 के आम चुनावों से राजनीति में एंट्री की और गुरदासपुर के बीजेपी सांसद सनी देओल के लिए प्रचार किया। उनकी पहली फिल्म 2015 में ‘रमता जोगी’ थी, हालांकि, उन्हें पहचान 2018 की रिलीज़ ‘जोरा दास नम्ब्रिया’ से मिली।

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