भारत के लिए राजनीतिक और भौगोलिक संप्रभुता से भी अति संवेदनशील विषय है तकनीकी संप्रभुता

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app bans by india

चीन और भारत के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर बढ़ती तनातनी से भारत ने तकनीकी संप्रुभता का हवाला देते हुए भारत सरकार के द्वारा चीन के 59 बहुचर्चित ऐप्स को प्रतिबंधित कर चीनी खेमे में खलबली सी मचा दी है। इस फैसले से चीन के आईटी सेक्टर को लाखों करोड़ का नुक़सान होगा। लेकिन शायद चीन के लिए इतना ही काफी नहीं है । अभी भी रेडमी , Huawei, जैसी चीनी कंपनी भारत में लाखों करोड़ रुपए का व्यापार कर रहीं है। हम सभी जानतें है कि आज के इस आधुनिक युग में डाटा की कीमत गोल्ड यानी सोने जैसे कीमती धातु से कम नहीं होती है।

चीन एक ओर तो वैश्विक स्तर पर विस्तारवादी सोच का पर्याय बनता जा रहा है। मगर दूसरी ओर भारत जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले देश को अपने चीनी बाज़ार का कब्ज़ा जमाकर आर्थिक रूप से गुलाम बनानें के प्रयास में है। आधुनिकता के बढ़ते दौर का आधार है टेक्नोलॉजी। वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी की डिमांड की सप्लाई को पूरा करनें में चीन सक्षम भी है और साथ ही चीन की दोहरी सोच वाली गंदी नीतियों के अन्तर्गत वो अपने बाज़ार में विदेशी कंपनियाें को बिज़नेस करने का अवसर तो देती है मगर कई शर्तों के साथ। उदहारण के तौर पर अगर भारत की कोई कंपनी चीन में अपना सामान निर्यात करती है तो उस पर चीन की कम्युनिस्ट सरकार चीन की कंपनी को आर्थिक तौर पर मदद करती है बल्कि भारत की नहीं।

हम भारत वासियों को अमेरिका से सीखना चाहिए, अमेरिका ने Huawei जैसी कंपनी को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है । दलील दी है कि ये कंपनी चीन की सेना से एसोसिएट है जो कि कभी भी सुरक्षा की दृष्टि से खतरा बन सकती है। लेकिन भारत जल्द ही 5g नेटवर्क की शुरुआत करनें के प्रयास में हैं जिसका स्पेक्ट्रम भारत सरकार जल्द ही बेचने की तैयारी में है ।मगर 5g के हार्डवेयर में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों में Huawei जैसी चीनी कंपनी का बहुत अहम रोल है । इसी विषय को लेकर कुछ ही दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से भारत को एक वार्निंग लेटर भी प्राप्त हुआ जिसमें साफ तौर पर लिखा था कि भारत भी Huawei जैसी कंपनी का बहिष्कार करे वरना भारत को तकनीक के व्यापार में अमेरिका से हाथ धोना पड़ सकता है। साथ ही सुरक्षा को लेकर कड़े शब्दों में आगाह भी किया। इस लेटर को तूल देते हुए भारत के टेलीकॉम मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने भी Huawei को लेकर साइबर सुरक्षा को प्राथमिक बताते हुए साफ़ किया कि ज़रूरी नहीं की वो 5g के हार्डवेयर की खरीद को लेकर Huawei का ही रुख करे । इस बयान का इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि Huaweo ने अपना ऑफिशियल नोट भी जारी करते हुए इस विषय को महत्पूर्ण मानते हुए दलील भी दे डाली और भारत से नो वैक डोर पैक्ट की बात कही जिसके अन्तर्गत अगर भारत को इस तकनीकी व्यापार के दौरान जरा सा भी कोई सुरक्षा को लेकर संसए लगे तो Huawei तुरंत उल्टे पैर चीन वापस चली जाएगी। तो इसीलिए उपर्युक्त तथ्यों से ये साफ हो जाता है कि मात्र 59 ऐप्स को प्रतिबंधित कर देना ही चीन को करारा जवाब देने के लिए काफी नहीं है।

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