दुनिया भर की तमाम रिसर्च Covid को Chinese Virus ही मानती हैं

कोरोना का पहला मामला कब आया ? कोरोना का पहला मामला कहाँ आया ? कोरोना को क्यों छुपाया गया ?

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आखिर क्या है कोरोना संक्रमण की थ्योरी?

क्या आप जानते हैं कि कोरोना की पहली वेव कहाँ से और कब आई? कोरोना दुनिया में कैसे आया? कैसे इसने पूरे विश्व मे तबाही मचाई? तो इन बातों का जवाब दे पाना तो मानो एक टेढ़ी खीर हो गयी है। हर देश के पास इसकी एक अलग ही थ्योरी है। इस आर्टिकल में इसे पेश करने की एक छोटी सी कोशिश है।

दरअसल चीन में 1 महीने की रिसर्च के बाद, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक टीम ने कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति की जांच करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि वायरस संभवतः चमगादड़ में उत्पन्न हुआ होगा और एक मध्यवर्ती जानवर के माध्यम से लोगों तक पहुंच गया। लेकिन एक बुनियादी सवाल यह है कि कोविड-19 ने पहली बार लोगों को कब, कहां और कैसे संक्रमित किया?

इस बात का जवाब दे पाना कि कोविड का पहला केस पहली बार किस दिन और कहाँ पाया गया था यह बताना तो शायद कभी मुमकिन ही न हो पाए क्योंकि इसके जवाब हर किसी देश और हर किसी इंसान के पास अलग ही हैं।

कुछ वैज्ञानिकों का यह मानना है कि वायरस का लैब से ज्यादा जानवरों से फैलने के आसार हैं। उनका कहना है कि पहले भी कुछ रोगकारी वायरस जानवरों से इंसानों में फैले हैं इसलिए कोरोना वायरस के भी जानवरों से फैलने के आसार ज्यादा हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि यह संभव है कि वायरस दक्षिणी चीन में खेतों के संक्रमित जमे हुए जंगली जानवरों के माध्यम से वुहान बाजार में प्रवेश कर गया और फिर प्रकोप फैलने लगा।

उनका कहना है कि बाजार में बिकने वाले फ्रोजन फूड में वायरस हो सकता है। कोरोना से संक्रमित होने वाले पहले व्यक्ति ने भी यह उल्लेख किया कि उसके माता-पिता एक स्थानीय सामुदायिक वेट मार्केट गए थे।

WHO के मुताबिक पहला केस कार्यालय कर्मचारी का था जिसमें दिसंबर 2019 को लक्षण दिखने शुरू हो गए थे, लेकिन वायरस शायद इससे पहले से शहर में था, क्योंकि इस महीने के अंत तक यह अच्छी तरह से स्थापित हो गया था।

कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर नई थ्योरी:

कोरोना वायरस की नई थ्योरी के अंतर्गत चीन में दिसंबर से एक दो महीने पहले ही कोरोना फैलने की बात सामने आई। इस थ्योरी ने चीन के ऊपर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में भी कहा गया था कि नवंबर 2019 में चीन में कोरोना के केस आने शुरू हो गए थे। कोविड-19 अक्टूबर की शुरुआत और नवंबर 2019 के मध्य के बीच उभरा और जनवरी तक पूरे विश्व स्तर पर फैल गया। रिपोर्ट्स में 17 नवंबर को चीन में कोरोना का पहला केस आने की संभावना बताई है। कुछ दिनों पहले जारी किए गए एक वैज्ञानिक पत्र के बाद पता चला है कि 1 दर्जन से अधिक कोरोना वायरस परीक्षण अनुक्रम जो महामारी के शुरुआती महीनों के दौरान प्राप्त किए गए थे उन्हें वायरस के विकास को ट्रैक करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस से हटा दिया गया था।

इस डाटा को हटाना चीन के कोविड-19 की उत्पत्ति को कवर करने की कोशिश दर्शाता है। अगर सोचा जाए तो वैज्ञानिक़ उन डाटाबेस को क्यों हटाएंगे जो यह सूचना देते हैं कि वुहान मैं कोविड आया कैसे? यह सूचित करते हैं कि वुहान में कोविड शुरुआत कैसे हुई?

वैसे तो चीन में कोविड-19 का पहला मामला नवंबर 2019 में चीन में पाया गया लेकिन चीन ने इसे दिसंबर 2019 में दर्ज किया था जो कि हुनान सी फूड बाजार से जुड़ा था लेकिन कुछ शुरुआती मामलों में कोविड की हुनान के साथ जुड़े होने की संभावना कम देखी गई, जिसका सिर्फ एक ही मतलब निकलता है कि वायरस पहले से ही फैलना शुरू हो चुका था।

रिपोर्ट में कोरोना के नवंबर में आ जाने का कैसे पता चला:

PLOS रिसर्च जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में कोरोना नवंबर में ही आ गया था, लेकिन चीन के मुताबिक कोरोना का पहला केस दिसंबर में आने की बात चीन की असहमति दिखाती है। यूके में मैथमेटिकल मॉडल रोबोट और उनके साथियों द्वारा पशु पक्षियों की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए तैयार किया गया था, जिसकी मदद से वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमण की शुरुआत होने की तारीख का पता लगाया, इसके चलते कोविड-19 के नवंबर में आने की बात सामने आई।

कुछ समय पहले अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने वुहान की लैब से नवंबर में महामारी फैलने का दावा किया था। चीन ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया साथ ही चीन ने अमेरिका की लैब से कोरोना वायरस महामारी के फैलने का अमेरिका पर आरोप लगाया। अमेरिकी अखबार में छपी खबर से यह बात सामने आई कि वुहान की लैब के रिसर्चर कोरोना जैसे लक्षणों के साथ 2019 नवंबर में बीमार पड़े थे जिसके बाद उन्होंने चीन में नवंबर में कोरोना संक्रमण फैलने का अनुमान लगाया।

दिसंबर 2019 से पहले ही वैज्ञानिकों को कोविड-19 बीमारी फैलने वाले Sars-CoV-2 कोरोना वायरस के बारे में तब पता चला जब चीन के वुहान में कुछ लोगों के इससे संक्रमित होने की ख़बर आई, लेकिन एक नए शोध के अनुसार महामारी का कारण बना ये वायरस इससे कई सप्ताह पहले लोगों को संक्रमित कर चुका था।

अमेरिका के सेंटर्स फ़ॉर डीज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेन्शन (सीडीसी) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस शोध के नतीजों को क्लिनिकल इन्फ़ेक्शियस डीज़ीज़ नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया था।

अब तक मौजूद जानकारी के अनुसार आधिकारिक तौर पर वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस के बारे में 31 दिसंबर 2019 को तब जानकारी मिली जब चीन के वुहान के हुबेई प्रांत के स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक चेतावनी जारी कर कहा कि यहां कई ऐसे मामले दर्ज किए जा रहे हैं, जिनमें निमोनिया के गंभीर लक्षण हैं। उन्होंने इस बीमारी को अजीब तरह की सांस लेने से संबंधित बीमारी कहा था। लेकिन महामारी के शुरू होने के ग्यारह महीनों बाद शोधकर्ताओं का कहना था कि अमेरिका के तीन राज्यों में 39 ऐसे लोग थे जिनके शरीर में कोरोना वायरस के एंटीबॉडीज़ मिले थे। ये एंटीबॉडीज़ चीन के कोरोना वायरस से जुड़ी चेतावनी देने के दो सप्ताह पहले उनके शरीर में मौजूद थे, हालांकि अमेरिका में Sars-Cov-2 का पहला मामला 21 जनवरी 2020 को ही दर्ज किया गया था।

यह भी पढ़ें : चीन से नहीं अमेरिका से आया है कोरोना वायरस?

शोध के नतीजे:

इस शोध के अनुसार अमेरिका में 13 दिसंबर 2019 से लेकर 17 जनवरी 2020 के हुए ब्लड डोनेशन में कुल 7,389 लोगों ने ख़ून दिया था। इनमें से 106 लोगों के ख़ून के नमूनों में कोरोना वायरस की एंटीबॉडीज़ मिली हैं।

किसी व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडीज़ मिलने का मतलब है कि वो व्यक्ति वायरस से संक्रमित हुआ है और उसके रोग प्रतिरोधक तंत्र ने उस वायरस से निपटने के लिए एंटीबॉडीज़ बनाई हैं।

कैलिफ़ोर्निया, ओरेगॉन और वॉशिंगटन में 13 से 16 दिसंबर के बीच लिए गए ख़ून के नमूनों में से 39 में कोरोना वायरस की एंटीबॉडीज़ हैं। अधिकतर लोग जो इस वायरस के संपर्क में आए थे वो पुरुष थे और उनकी औसत उम्र 52 साल थी।

शोधकर्ताओं का मानना है कि हो सकता है कि इन लोगों के शरीर में पहले से ही मौजूद किसी कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ एंटीबॉडीज़ बन गई हों। हालांकि उनका कहना है कि शोध के अनुसार अधिकतर लोग जिनमें एंटीबॉडीज़ मिले हैं उनमें से कई लोगों में उस वक्त कोविड-19 के लक्षण भी मौजूद थे।

कोरोना फैलने की कई अलग-अलग थ्योरी हैं:

चीन के वैज्ञानिकों ने 2020 में ब्राजील के फ्रोजन फूड से कोरोनावायरस के आने की बात कही थी और चीन में फ्रोजन फूड से कोरोनावायरस की संभावना भी सामने आई थी। इसके अलावा उसी साल डॉनल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस चीन की लैब से फैलने का दावा किया और अमेरिकी अखबार के मुताबिक चीन की लैब के रिसर्चर के संक्रमित होने की बात भी सामने आई लेकिन वहीं दूसरी तरफ 2021 में WHO चीन की लैब से कोरोना वायरस फैलने वाली बात से असहमत रहा।

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