मीराबाई चानू की जीत की वजह बहुत खास है

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Meerabai chanu

मीराबाई चानू ने जीता टोक्यो ओलंपिक का पहला पदक :

टोक्यो ओलंपिक की धमाकेदार शुरुआत शुक्रवार को हुई, ओलंपिक की शुरुआत के साथ ही भारत को अपना पहला पदक प्राप्त हुआ है, जोकि मीराबाई चानू ने जीता है। 115 किलो वजन उठा कर मणिपुर की मीराबाई चानू ने भारत को टोक्यो ओलंपिक्स में पहला मेडल दिलाया, जिन्होंने 49 किलोग्राम वर्ग में अपने सफल प्रयासों के दौरान कुल 202 किलोग्राम वजन उठाया है, जिसमें से स्नैच में उन्होंने 87 किलोग्राम वजन उठाया और क्लीन एंड जर्क में 115 किलोग्राम उठाकर वेटलिफ्टिंग में सिल्वर पदक प्राप्त किया है। हालांकि मीराबाई की तरफ से पूरी कोशिश रही कि वह गोल्ड पदक लेकर जाएं, उन्होंने स्नैच में 89 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 117 किलोग्राम उठाने की अपनी पूरी कोशिश की लेकिन आखिर में उन्होंने 115 किलोग्राम उठाकर रजत पदक जीता।

टोक्यो ओलंपिक में भारत का यह पहला पदक है लेकिन वेटलिफ्टिंग में भारत का यह दूसरा पदक है, पहले करणम मल्लेश्वरी ने 2000 में हुई समर ओलंपिक में पहला स्वर्ण पदक जीता था, उसके बाद मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक 2021 में रजत पदक जीतकर एक बार फिर इतिहास रचा है। वेटलिफ्टिंग में लगभग 21 साल बाद भारत को पदक मिला है।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके मीराबाई को बधाई दी है, उन्होंने कहा कि “मीराबाई चानू के शानदार प्रदर्शन के साथ ओलंपिक में रजत पदक जीतने पर उन्हें बधाई,उनकी सफलता हर भारतीय को प्रेरित करती है।”  प्रधानमंत्री से लेकर खेल मंत्री तक सब ने उन्हें बधाई दी है और भारत के लिए यह एक बहुत ही खुशी के मौके के रूप में सामने आया है।

2014 से 48 किलोग्राम वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में नियमित उपस्थिति से मीराबाई चानू ने राष्ट्रमंडल खेलों में विश्व चैंपियनशिप के साथ और भी कई पदक जीते हैं। खेल में उनके योगदान के लिए चानू को 2018 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया और साथ ही मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने उनको सम्मानित करते हुए उन्हें 20 लाख रुपए का पुरस्कार दिया, इसके अलावा 2018 में ही उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से भी सम्मानित किया गया ।

मीराबाई चानू की उपलब्धियाँ :

मीराबाई का जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर में हुआ था, एक बच्चे के रूप में लकड़ियां उठाने से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चढ़ने तक मीराबाई चानू की कहानी उल्लेखनीय है। मीराबाई चानू ने 20 साल की उम्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि हासिल की जब उन्होंने स्कॉटलैंड में हो रहे 2014 राष्ट्रीयमंडल खेलों के अंतर्गत 48 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता, इसके बाद 2016 में वह लाइमलाइट में आईं जब पटियाला में हो रहे रियो ओलंपिक 2016 में ट्रायल के दौरान वे महिला राष्ट्रीय कोच और विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता रहीं। उन्होंने कुंज रानी देवी के वेटलिफ्टिंग में 12 साल से बने हुए 48 किलोग्राम वर्ग के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ा जिससे मीराबाई उस समय ओलंपिक में पदक जीतने के लिए एक उम्मीद बनकर उभरीं लेकिन बड़े मंच के दबाव में आकर ओलंपिक आयोजन को पूरा करने में वह विफल हो गयीं।

2014 के राष्ट्रीय मंडल खेलों में पदक जीतने वाली मीराबाई चानू ने जबरदस्त वापसी की, जब वह 2017 में करणम मल्लेश्वरी के बाद कैलिफोर्निया के अनाहेम में वर्ल्डवेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बनी जोकि वेटलिफ्टिंग में उनकी पहली सबसे बड़ी उपलब्धि रही है, 2016 में उन्होंने गुवाहाटी में 12वीं दक्षिण एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था और आज टोक्यो ओलंपिक्स के पहले ही दिन उन्होंने रजत पदक जीतकर देश का सिर एक बार फिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

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