पेट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दामों की मुख्य वजह

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रविवार को सरकारी तेल कंपनियो ने पेट्रोल की खुदरा कीमत में 35 पैसे और डीजल में 16 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि कर स्पष्ट कर दिया है कि इन उत्पादों के दाम में वृद्धि का सिलसिला फिलहाल जारी रहेगा। सरकारी तेल कंपनियों ने एक बार फिर इस वृद्धि के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड यानी कच्चे तेल की कीमतों को वजह बताया है लेकिन सरकार की तरफ से दिए गए आंकड़े ही इस बात की गवाही हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों का घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों से कोई लेनादेना नहीं |

दाम क्यों बढ़ रहे हैं ?

दाम बढ़ने का कारण केंद्र और राज्य सरकारों का रेवेन्यू के लिए पेट्रोल और डीजल पर निर्भर करना हो सकता है| लॉकडाउन के चलते गाड़ियों का प्रयोग काफी कम हो गया है| लोग सिर्फ जरूरी कामों के लिए ही बाहर निकलते हैं जिससे उन्हें पेट्रोल भी ज्यादा नहीं भरवाना पड़ता| जिसके चलते देशभर में पेट्रोल और डीजल की माँग बहुत कम हो गई है, इसी कारण से सरकार की रिवेन्यू में भी काफी कमी आ गई है| लगभग सारी आर्थिक गतिविधियां लॉकडाउन के चलते बंद सी हो गई हैं जिसकी वजह से सरकार के खजाने में भी प्रभाव पड़ा है| इन्हीं कारणों से पेट्रोल और डीजल के दामों में काफी समय से महंगाई देखने को मिल रही है|

दामों के लगातार बढ़ने में टैक्स की भूमिका :

पिछले काफी समय से पेट्रोल और डीजल के दामों में मंहगाई आ गई है, जिसमें बेशक केंद्र और राज्य सरकार की भूमिका है| केंद्र सरकार द्वारा 2014 -15 में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क से 29,279 करोड़ और डीजल पर 42,881 करोड रुपए एकत्रित किए गए थे| सरकार ने 2014–15 में उत्पाद शुल्क के साथ 74,158 करोड़ रुपए एकत्रित किए जो कि 2020–2021 की अवधि में बढ़कर 2.95 लाख करोड रुपए हो गए| पेट्रोल और डीजल पर टैक्स जो कि 2014- 15 में 5.4 प्रतिशत था वह बाद में बढ़कर 12.2 प्रतिशत हो गया| सरकार ने अक्टूबर 2017 में उत्पाद शुल्क में 2 रुपए और उसी के 1 साल बाद 1.05 रुपए की कटौती की थी| लेकिन जुलाई 2019 में उत्पाद शुल्क बढ़ाकर 2 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया था|

वर्ष 2020-21 के पहले 10 महीनों में पेट्रोल और डीजल पर संग्रह बढ़कर 2.94 लाख करोड़ हो गया| दिल्ली में पेट्रोल की मौजूदा कीमत का 60 फ़ीसदी टैक्स है वहीं उत्पाद शुल्क मूल्य का 36% है| ऐसी मँहगाई में हो सकता है कि मोदी सरकार राहत देने के लिए अपने टैक्स में कमी करे|

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जीएसटी के दायरे में लाने से परहेज :

हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के डाटा के मुताबिक पहली जुलाई को दिल्ली स्थित उसके पेट्रोल पंप पर पेट्रोल की खुदरा कीमत 98.84 रुपये थी जिसमें 32.90 रुपया केंद्रीय टैक्स, 22.82 रुपये राज्य का टैक्स और 3.82 रुपये डीलर का कमीशन था। फिर, केंद्र के खाते में जितना भी टैक्स आता है उसका 45 फीसद भी राज्यों को जाता है। पेट्रोल-डीजल पर टैक्स की कमाई कई राज्यों के राजस्व का बड़ा हिस्सा है। इसलिए भी अधिकतर राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना ही नहीं चाहती हैं।

भारत की तरफ से खरीद :

वर्षक्रूड का औसत दाम (डॉलर प्रति बैरल)
2004-0539.21
2005-0655.72
2006-0762.46
2007-0879.25
2008-0983.57
2009-1069.76
2010-1185.09
2011-12111.89
2012-13107.97
2013-14105.52
2014-1584.16
2015-1646.17
2016-1747.56
2017-1856.43
2018-1969.88
2019-2060.47
2020-2144.82 
श्राेत : जागरण

   

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