वन नेशन वन राशन कार्ड योजना, अब हर गरीब काे मिलेगा राशन

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Image: Rashtrahit Media

वन नेशन वन राशन कार्ड योजना

मई 2019 में “वन नेशन वन राशन कार्ड” स्कीम लागू की गई थी| अगस्त 2019 में चार राज्यों में राशन कार्ड की अंतर राज्य प्रोबेबिलिटी शुरू की गई थी| ONORC यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत प्रवासी श्रमिकों उनके परिवारों को राशन कार्ड के माध्यम से पोषण तक पहुँचाया जा सके|

2019 में केंद्र में तेलंगाना – आंध्र प्रदेश के साथ-साथ  महाराष्ट्र – गुजरात के बीच राशन कार्ड की अंतर राज्य प्रोबेबिलिटी की शुरुआत की गई| इसका मतलब यह है कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में रहने वाले लाभार्थी द्वारा किसी भी राज्य की राशन की दुकान से राशन खरीदा जा सकता है| उस समय सरकार देश में 5,00,000 राशन की दुकानों के माध्यम से 81 से अधिक लोगों को प्रति माह प्रत्येक व्यक्ति को 5 किलोग्राम खाने की आपूर्ति करती थी|

अंतर्राष्ट्रीय प्रोबेबिलिटी की शुरुआत करते हुए तत्कालीन फूड मंत्री रामविलास पासवान ने शुरुआती दिन को एक ऐतिहासिक दिन कह कर संबोधित किया था| उस दिन उन्होंने राशन कार्ड की अंतर राज्य प्रोबेबिलिटी को 2 राज्यों को जोड़कर शुरू किया था|

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योजना क्या है?

फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत जारी राशन कार्ड रखने वाले व्यक्ति देश में किसी भी उचित मूल्य की दुकान से अपना मासिक अनाज का कोटा प्राप्त कर सकते हैं| यह एक तकनीक संचालित प्रणाली है जो मजदूरों, दैनिक कमाई करने वालों, ग्रामीणों, शहरी गरीबों जैसे कचरा बीनने वालों को अपने दिन भर के खानपान का कोटा प्राप्त कराती है| ऐसे जरूरतमंद लोग अपने राशन कार्ड के मदद से देश में कहीं भी अपनी पसंद के किसी भी इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट और सक्षम उचित मूल्य की दुकानों से खाना ले सकते हैं|

इस योजना के तहत केंद्र प्रत्येक व्यक्ति को हर महीने 5 किलोग्राम खाना प्रदान कराता है| 2-3 रुपए प्रति किलो के दाम पर लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को खाना मिलता है| अगस्त 2020 में यह योजना 24 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की गई , जिसमें लगभग 65 करोड लोगों को लाभ मिला जो कि आबादी का लगभग 80% हिस्सा है|

पिछले 1 साल में कोविड-19 से संबंधित चुनौतियों के बावजूद, कुल 32 राज्यों में लगभग 69 करोड़ NFSA लाभार्थियों को कवर किया गया यानी देश में 86% NFSA आबादी को दिसंबर 2020 तक वन नेशन वन राशन योजना के तहत तेजी से लाया गया|

योजना के फायदे :

वैसे तो यह योजना सभी मजदूर, शहरी गरीब जैसे कचरा बीनने वाले , सड़क पर रहने वाले , संगठित और असंगठित क्षेत्रों में अस्थाई श्रमिको, घरेलू कामगारों आदि जिनके पास राशन कार्ड है उन सभी के लिए लाभकारी है लेकिन इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा उन गरीबों को है जो रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य और शहर में जाते हैं, जहाँ उन्हें अपने राशन कार्ड का फायदा नहीं मिल पाता| इस योजना से उन्हें दूसरे राज्यों में भी अपने राशन कार्ड का फायदा मिल पाएगा और उन्हें खाने पीने को लेकर परेशान नहीं होना पड़ेगा|

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश :

वन नेशन वन राशन योजना के तहत सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी श्रमिकों के लाभ और कल्याण के लिए कई निर्देश जारी किए हैं|

केंद्र सरकार को प्रवासी कामगारों के पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के परामर्श से पोर्टल विकसित करने का निर्देश दिया गया है| साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि केंद्र सरकार के साथ-साथ संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को असंगठित कामगारों के लिए राष्ट्रीय डेटा बेस (एनडीयूडब्ल्यू परियोजना) के तहत पंजीकरण के लिए पोर्टल की प्रक्रिया को पूरा करने के साथ-साथ इसे 31.07.2021 से पहले लागू किया जाए| केंद्रशासित प्रदेश प्रवासी कामगारों और असंगठित मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाएं घोषित की गई हैं|

केंद्र सरकार ने राज्यों द्वारा बनाई गई योजना के तहत प्रवासी मजदूरों को वितरण के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा मांग के अनुसार अतिरिक्त मात्रा में खाद्यान्न वितरित करने का बीड़ा उठाया है|

राज्यों को प्रवासी मजदूरों को सूखे राशन के वितरण के लिए एक उपयुक्त योजना लाने का निर्देश दिया गया है| राज्य 78 उपयुक्त योजना पर विचार करेंगे और लाएंगे, जिसे 31.07.2021 को या उससे पहले लागू किया जा सकता है।  ऐसी योजना को वर्तमान महामारी (कोविड-19) जारी रहने तक जारी और संचालित किया जा सकता है।

राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को उन प्रमुख स्थानों पर सामुदायिक रसोई चलाने के लिए निर्देश दिए गए है जहाँ मजदूरों के पास एक दिन में दो भोजन की खरीद के लिए पर्याप्त साधन नहीं है। कम से कम महामारी (कोविड-19) जारी रहने तक सामुदायिक रसोई का संचालन जारी रखा जाएगा|

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