असम के बाद अब UP में भी जनसंख्या पर नीतियां बना रही है सरकार

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Image: Rashtrahit Media

कई सालों से जनसंख्या नियंत्रण को लेकर केंद्र सरकार से एक कानून लाने की अपील की जा रही थी। जिसमें जिन लोगों के दो बच्चों से अधिक बच्चे होंगे उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ न मिले परन्तु केंद्र सरकार की तरफ से ऐसा कोई नियम या कानून नहीं बनाया गया| लेकिन असम सरकार ने पहली बार जनसंख्या नियंत्रण के लिए नीति बनाई है जिसमें दो बच्चों से अधिक बच्चों वाले दंपत्ति को सरकारी सुविधाओं से वंचित रखा जाएगा। वहीं योगी सरकार भी कुछ ऐसी ही योजना पर काम कर रही है।

यदि देखा जाए तो 2011 के जनगणना के आधार पर भारत की जनसंख्या 130 करोड़ है और वहीं अगर संसाधनों की बात की जाए तो वो शायद 100 करोड़ की जनसंख्या पर भी कम ही पड़ेगी। पीने के पानी की कमी, खाने की कमी, रहने के लिए जमीन की कमी इत्यादि। रहने की कमी और खाने की कमी को पूरा करने के लिए जंगल लगातार काटे जा रहे हैं। कहने का मतलब है कि यदि ऐसा जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं आया तो आगे कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

असम जनसंख्या नीति:

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार को कानून में कुछ बदलाव की बात की। उनके मुताबिक अब राज्य सरकार कुछ योजनाओं में दो बच्चे नीति लागू करेगी जिसमें सिर्फ दो या दो से कम बच्चों वालों को कुछ विशेष योजनाओं के लाभ दिए जाएंगे। इसी के चलते यूपी सरकार भी अब असम की राह पर है।

योगी सरकार के मुताबिक सरकारी योजनाओं का लाभ अब दो बच्चा नीति का पालन करने वालों को ही होगा। यूपी में जनसंख्या नियंत्रण के लिए राज्य विधि आयोग ने कानून में बदलाव करने भी शुरू कर दिए हैं। साथ ही हिमंत बिस्वा ने दो बच्चा नीति को सारी योजनाओं में तुरंत लागू ना करने का दावा किया है क्योंकि कुछ योजनाओं में जनसंख्या नियंत्रण नीति लागू नहीं की जा सकती। जैसे-बच्चों की मुफ्त पढ़ाई से संबंधित योजनाएं और गरीब लोगों की रोजी-रोटी से संबंधित योजनाओं में इस नीति को लागू नहीं किया जा सकता। यह योजनाएं केंद्र से भी जुड़ी हुई हैं, लेकिन जो योजनाएं सिर्फ राज्य सरकार से जुड़ी हैं उनमें जनसंख्या नियंत्रण नीति को लागू किया जा सकता है, यह भी मुमकिन है कि कुछ समय में इस नीति को हर योजना में लागू किया जा सकता है|

जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत क्यों है ?

चाहे योजनाओं को लागू करने की बात करें, ट्रैफिक जाम की बात करें या फिर कोरोना काल की, जनसंख्या एक बड़ी कठिनाई बन कर सामने आती है। पिछले कुछ समय में देश की जनसंख्या दोगुनी हो चुकी है। जनसंख्या ज्यादा होने के कारण कोरोना काल में कुछ लोगों की जान अस्पताल में बेड ना मिलने से चली गई। यहाँ तक कि देश में जितनी जनसंख्या है उतनी वैक्सीन मिल पाना भी मुश्किल हो गया है।

योजनाओं को लागू करने की बात की जाए तो जितने लोगों को उस योजना की आवश्यकता है उतनों का डाटा भी पूरा नहीं मिल पाता और काफी लोगों तक योजना पहुंचने में बहुत समय लग जाता है। कोरोना काल में भी सड़कों पर इतनी आबादी हो जाती है कि पैर रखने तक की जगह नहीं होती।इसके अलावा बेरोजगारी और भुखमरी जैसी समस्या भी जनसंख्या ज्यादा होने के प्रमुख कारण है। जनसंख्या के मुकाबले अब संसाधन ज्यादा नहीं बचे हैं। ऐसी स्थिति में जनसंख्या नियंत्रण कानून का लागू होना बहुत लाभकारी होगा।

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यूपी में चुनाव:

यूपी में जनसंख्या नियंत्रण नीति काफी चर्चा में चल रही है। हम दो, हमारे दो जैसे सोच रखने वालों को सरकारी योजनाओं का काफी लाभ होने वाला है। यूपी में चुनाव है तो क्या यह जनसंख्या नियंत्रण नीति योगी बाबा का कोई मास्टर स्ट्रोक हो सकता है?

जनसंख्या नियंत्रण नीति के विषय में काफी समय से विचार-विमर्श हो रहा है लेकिन इसे लागू करने के बाद चुनाव के आसपास आई। इस योजना के लागू हो जाने से लोगों को एक नई उम्मीद मिलेगी। सरकारी नौकरियों में, योजनाओं में लाभ मिलेगा और वह सरकार को वोट देकर अपने लाभ सुनिश्चित करेंगे। हालांकि इस योजना का फायदा हर किसी को नहीं होगा जिनके 2 से ज्यादा बच्चे हैं वह यह लाभ नहीं उठा पाएंगे|

विरोध कौन कर रहा है:

कुछ लोगों का यह कहना है कि मुस्लिम और गरीब लोग जिनके 2 से ज्यादा बच्चे हैं उनके साथ सही नहीं हो रहा। एक गरीब व्यक्ति जिसकी जिंदगी कुछ सरकारी योजनाओं के सहारे चल पा रही है उसे उन योजनाओं से वंछित होना पड़ेगा और मुस्लिम आबादी काफी ज्यादा है उन्हें भी कोई लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा कुछ राजनीतिक नेताओं ने जनसंख्या नियंत्रण को हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा बनाने की कोशिश की। जब मोदी ने एक भाषण में जनसंख्या विस्फोट के विषय मे बात उठाई तो काफी लोगों ने इस पर आपत्ति जताई। इस नीति के विषय में सबके अपने-अपने विचार हैं। एक तरफ कुछ लोग इसका पालन करना चाहते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ 2021 में जब इस कानून की हलचल हुई तो इसका विरोध करने लगे लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से इस पर कोई ऑफिशियल ऐलान नहीं आया है।

अगर कुछ लोगों की मानी जाए तो उनका कहना है कि यह कानून अगर लागू किया जाएगा तो भविष्य के लिए किया जाएगा पुराने लोगों पर या उनके परिवार पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

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