राम मंदिर के काम में दखल देकर अपनी राजनीति चमका रहे हैं संजय सिंह

जब शुभ काम होता है तो अड़ंगा डालने वाले खुद ही चले आते हैं , संजय सिंह भी वही हैं |

0
71
ram mandir scam
Image: Rashtrahit Media

अयोध्या के राम मंदिर का मामला लगभग 400 सालों से एक ऐसा मुद्दा बना हुआ था जो सुलझने का नाम नहीं ले रहा था। असली विवाद 23 दिसंबर 1949 को शुरू हुआ जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं। जिसके बाद यह केस कोर्ट में गया और कई साल लग गए इस मुद्दे को खत्म होने में जिसके बाद वहाँ राम मंदिर बनाने का फैसला लिया गया लेकिन यह मुद्दा अब एक बार फिर सुर्खियों में बना है जिसमें विवाद है भ्रष्टाचार पर।

राम मंदिर का निर्माण करा रहे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगा है। आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस जमीन की कीमत 2 करोड़ रुपए थी, उसे 5 मिनट बाद ही 18.5 करोड़ में खरीदकर बड़ा घोटाला किया है। आप और सपा ने अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई से जांच की मांग की है।

आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला-

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने रविवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए उसकी जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की मांग की थी। संजय सिंह ने लखनऊ में दावा किया था कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने संस्था के सदस्य अनिल मिश्रा की मदद से दो करोड़ रुपये कीमत की जमीन 18 करोड़ रुपये में खरीदी। उन्होंने कहा था कि यह सीधे-सीधे धन शोधन का मामला है और सरकार इसकी सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराए। जिसके बाद से यह मुद्दा गरम होगया और नेताओं की प्रतिक्रियाएं चालू हो गयीं।

विपक्ष पार्टियों ने श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से संबंधित एक जमीन सौदे में लगे भ्रष्टाचार के आरोप को लेकर जवाब मांगा है। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस ‘घोटाले’ पर जवाब देना चाहिए। इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सुप्रीम कोर्ट से यह आग्रह किया है कि वह मंदिर निर्माण के चंदे के रूप में प्राप्त राशि और खर्च का ऑडिट करवाए। साथ ही चंदे से खरीदी गई सारी जमीन की कीमत को लेकर भी जांच की जाए। सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ‘भगवान श्री राम आस्था के प्रतीक हैं, पर भगवान राम की अलौकिक अयोध्या नगरी में श्री राम मंदिर निर्माण के लिए करोड़ों लोगों से एकत्रित चंदे का दुरुपयोग और धोखाधड़ी महापाप और घोर अधर्म है, जिसमें भाजपाई नेता शामिल हैं।’

सुरजेवाला ने दावा किया कि ‘जमीन की रजिस्ट्री के दोनों कागजों पर श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिल मिश्रा गवाह के तौर पर मौजूद हैं। दोनों कागजों पर दूसरे गवाह भाजपा के प्रमुख नेता और अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय हैं। इसका मतलब साफ है कि 2 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन पांच मिनट में 18.5 करोड़ रुपये में खरीदने के निर्णय की राममंदिर निर्माण ट्रस्ट के न्यासियों को पूरी जानकारी थी।

उन्होंने कहा, ‘श्री राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार 5 फरवरी, 2020 को हुआ। उपरोक्त तथ्यों से साफ है कि करोड़ों लोगों द्वारा राम मंदिर निर्माण के लिए दी गई दान राशि में घोर महापाप, अधर्म व घोटाला हुआ है लेकिन प्रधानमंत्री पूरी तरह से चुप हैं।’

सुरजेवाला ने प्रश्न उठाया कि क्या भगवान राम की आस्था का सौदा करने वाले पापियों को मोदी जी का संरक्षण प्राप्त है? यदि नहीं तो इसपे जांच होनी चाहिए। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के नाम पर इतना बड़ा कदाचार भाजपा नेताओं ने कैसे किया?’ साथ ही उनका एक प्रश्न यह भी था कि इस प्रकार और कितनी जमीन मंदिर निर्माण के चंदे से औने-पौने दामों पर खरीदी गई है?’

आखिर राम मंदिर निर्माण के लिए इस ट्रस्ट का गठन देश के उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर किया गया है। जब यह घोटाला और इसके तथ्य सामने हैं, तो देशवासियों की ओर से हमारी मांग है कि प्रधानमंत्री उपरोक्त सवालों का देश को जवाब दें। देश के प्रधान न्यायाधीश व उच्चतम न्यायालय पूरे मामले का संज्ञान लेकर न्यायालय की निगरानी में जांच करवाएं’

उन्होंने यह मांग भी की कि उच्चतम न्यायालय मंदिर निर्माण के चंदे के रूप में प्राप्त राशि व खर्च का न्यायालय के तत्वाधान में ऑडिट करवाए, मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे से खरीदी गई सारी जमीन की कीमत के आंकलन के बारे में भी जांच की जाए तथा न्यायालय देशवासियों व भक्तजनों के समक्ष वह ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करे।’

दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य :

मीडिया से बातचीत के दौरान उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि जो लोग पहले आरोप लगाते थे और कहते थे कि बीजेपी कहती है कि मंदिर वहीं बनाएंगे, लेकिन तारीख नहीं बताएंगे वे आज साजिश के तहत मंदिर निर्माण को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।

कैबिनेट बैठक के बाद डॉ दिनेश शर्मा ने जमीन खरीद में धांधली व भ्रष्टाचार के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि यह सिर्फ मंदिर निर्माण में बाधा पहुंचाने की साजिश है। कुछ लोग हैं जो यह नहीं चाहते कि मंदिर निर्माण का कार्य जारी रहे। उन्होंने कहा कि जो भी आरोप हैं वह राजनीति से प्रेरित हैं। जिसका जवाब संस्था देगी। उधर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी इस मामले में कहा कि विपक्ष अब फालतू अलाप कर रहा है अगर जरुरत पड़ी तो जांच होगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि हमें उन लोगों से सलाह की जरुरत नहीं है जिनके हाथ राम भक्तों के खून से रंगे हैं। ट्रस्ट आरोपों की जांच कर रहा है और अगर कोई भी दोषी होगा तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

राय का जवाब:

उधर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने भी आरोपों पर अपनी सफाई दी है। उन्होंने एक प्रेस रिलीज़ जारी करते हुए कहा कि खरीदी गई जमीन का अनुबंध विक्रेताओं ने काफी समय पूर्व कराया था। चंपत राय ने कहा कि मंदिर के परकोटा का रिटेनिंग वॉल के वास्तु दोष को ठीक करने के लिए मंदिर के आसपास की जमीनों को खरीदा गया। जो जमीन खरीदने में खुले बाजार मूल्यों पर खरीदी गई है। वह तो भूमि पर खरीदने के लिए वर्तमान विक्रेतागणों ने वर्षों पहले जिस मूल्य पर अनुबंध किया था उस मूल्य पर 18 मार्च 2019 को बैनामा कराया। उसके बाद ट्रस्ट के साथ अनुबंध हुआ है। महासचिव चंपत राय ने प्रेस नोट में यह भी लिखा है कि जो राजनीतिक लोग इस पर प्रचार कर रहे हैं। वह भ्रम फैला रहे हैं और जनता को गुमराह कर रहे हैं।

कुछ बातें ट्विटर की:

ट्विटर पर 13 जून को लगभग एक आंधी सी चली जिसमें सिर्फ दो ही चीजें दिख रही थीं। #RamMandirScam और #iTrustRamJanambhumiNayas जिसमें राम समर्थकों और असमर्थको के बीच एक युद्ध सा चल रहा था और यह सिलसिला चलते-चलते ट्रेंड तक पहुंच गया।
जिसके बाद ट्विटर, इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक आदि सोशल मीडिया पर मीम्स का सैलाब सा आ गया। जिसके बाद अगले ही दिन यह साबित हो गया कि यह जो आरोप लगाए जा रहे हैं वो गलत हैं और लोगों में आक्रोश देखने को मिला फिर से एक बार ट्विटर पर ट्रेंड चला #arrestsanjaysingh और #श्रीरामकेदुश्मन

राहुल गांधी ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा :

एक दिन पहले लगाए गए आरोप :

◆ राम मंदिर निर्माण में आ रहे चंदे पर ट्रस्ट द्वारा दुरुपयोग
◆ दो करोड़ की खरीदी गई जमीन को कुछ ही मिनटों बाद 18.5 करोड़ में बिक्री के लिए लिखा गया जिसके गवाह अनिल मिश्र हैं।
◆ लोगों की आस्था पर आघात।

यह देखकर कुछ चीज़ें ज़हन में आती हैं कि जो कागज़ात विपक्ष द्वारा दिखाए जा रहे हैं उनमें 10 रुपये का स्टाम्प पेपर भी है और किस बड़ी प्रॉपर्टी का बैनामा 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर होती है?

साथ ही कहा जा रहा है कि जब बैनामा हुआ था तब शाम के 7 बजे थे। तो कौन सा बैनामा इतनी शाम को होता है?

इसके बाद 14 जून को एबीपी न्यूज़ पर इस चीज़ की भी पुष्टि हुई कि इस जमीन का असली मालिक कौन है उसके बाद उसे किसने खरीदा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here