वैक्सीन तो बहाना है, असली मकसद तो खुन्नस निकालना है

ये कोई वैक्सीनेशन थोड़ी है, असली वैक्सीनेशन तो रवीश जी के ज़माने में हुआ था |

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ravish against vaacine
Image: Rashtrahit Media

21 जून 2021 एक ऐसी तारीख जिस दिन कोविड वैक्सीन लगने का एक रिकॉर्ड बना। काफी दिनों से कुछ विशेषज्ञ कह रहे थे कि भारत मे प्रतिदिन कम से कम 70 लाख डाेज लगने चाहिए और केंद्र सरकार ने कोशिश की और यह संख्या 86 लाख पहुंच गयी। इस दिन लगभग 86 लाख लोगों को वैक्सीन लगाई गई। जो देश मे एक सकारात्मकता लाई लेकिन स्वघोषित बुद्धिजीवी पत्रकार रवीश कुमार जी को इसमें भी नकारात्मकता ढूंढनी ही थी।

रवीश कुमार जी NDTV वाले जिन्हें मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके ज्ञान का समंदर इतना गहरा है कि वे इस क़दर उसमें डूब जाते हैं कि कुछ भी बोलने लगते हैं। वे कोरोना और पोलियो की बीमारी और उनके टीकाकरण की प्रक्रिया में कोई फर्क ही नहीं देख पाते और बेतुके फैक्ट्स के साथ उसे कंपेयर करते हैं।

रवीश जी का कहना है कि “फरवरी 2012 में पल्स पोलियो के तहत एक दिन में 17 करोड़ से अधिक को पोलियो की दो बूंद दवा पिलाई गयी थी। दस साल बाद गोदी मीडिया के प्रोपेगेंडा और करोड़ों रुपए के विज्ञापन के सहारे सरकार पूरा जोर लगाती है और एक दिन में 86 लाख लोगों को टीके ही लगा पाती है। पोलियो अभियान की आलोचना करने वाले इसके चरण की धूल भी नहीं छू सके। वो भी तब जब 6 महीने से ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि दुनिया का सबसे बड़ा टीका अभियान चल रहा है। उसके बाद भी पूरा दिन बीत जाने के बाद एक करोड़ की भी संख्या नहीं छू सके। तुर्रा ये कि ये दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है और विश्व रिकॉर्ड बन गया है।”

अब बात करते हैं फैक्ट्स की तो पोलियो का टीकाकरण 1995 में शुरू हुआ न कि 2012 में और 2012 तक यानी करीब 17-18 साल का समय तो इतने लंबे समय में 17 करोड़ लोगों को टीका लगाया गया। और यदि रवीश जी 2012 की बात कर रहे हैं तो कोई एक तारीख भी बता दें कि जिस दिन 17 करोड़ को पोलियो पिलाई गयी हों। यदि यह आंकड़ा पूरे साल का है तब भी यदि 86 लाख लोगों को प्रतिदिन टीका लगता है तो एक साल में 3,13,90,00,000 लोगों को टीका लग सकता है और 6 महीने निकल चुके हैं तो 6 महीने अगर यह अभियान यूँही बिना रुकावट चले तो 1,54,80,00,000 लोगों को 6 महीने में टीका लग जायेगा। लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं है कि ऐसा हो क्योंकि पोलियो पल्स अपनी जगह अच्छा काम था और कोविड वैक्सीनेशन का काम अपनी जगह ठीक है दोनों की कोई तुलना नहीं।

अब बात करते हैं पोलियो और कोविड वैक्सीन की तुलना की:

  1. पोलियो ड्रॉप को रख-रखाव के लिए जीरो से भी कम तापमान की आवश्यकता नहीं होती जबकि कोविड वैक्सीन को रखने के लिए ज़ीरो से भी कम तापमान की ज़रूरत होती है।
  2. पोलियो ड्रॉप कोई भी पिला सकता है जैसे NGO, वॉलंटियर्स, डॉक्टर्स, नर्सेज आदि जबकि कोविड वैक्सीन सिर्फ डॉक्टर्स, नर्सेज और मेडिकल प्रोफेशनल्स ही दे सकते हैं।
  3. पोलियो के वाइल्स को खोलने के लिए 10 यूज़र्स का एकसाथ होना आवश्यक नहीं है इसे कुछ देर के लिए कुक हुआ भी स्टॉक किया जा सकता है जबकि वैक्सीन की एक वाइल खोलने के लिए 10 यूज़र्स होने चाहिए क्योंकि एक बार में एक शीशी से 10 लोगों को वैक्सीन लगती है।

उसके बाद रवीश जी टारगेट करते हैं यूपी सरकार को और यूपी की जनसंख्या को:
सवाल– रवीश जी का कहना है कि “कोई भी टीका अभियान हो, क्या यूपी में सफ़ल हुए बिना रह सकता है? 23 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में कितने टीके लगे?”

जवाब- सर ज़रा ग्राउंड पर आइए और सच्चाई जानिए। सरकारी अस्पतालों के हालात पहले से बहुत अच्छे हो चुके हैं और लगभग 500 टीके प्रतिदिन लग रहे हैं। अब गलती तो जनता की भी है कि उनके घर-घर जाकर टीम वैक्सीनेशन करने की कोशिश करती है और लोग उसे अंध विश्वास और डर के कारण वैक्सीन तक नहीं लगाने देते। अभी तक शहरों में टीका अपॉइंटमेंट लेकर लगवाना पड़ रहा था लेकिन 21 जून को बिना अपॉइंटमेंट टीके लगे और एक दिन में 86 लाख डोज़ लगाए गए।

अब रही बात 23 करोड़ की आबादी की तो जल्द ही उत्तर प्रदेश या पूरे देश मे जनसंख्या नियंत्रण कानून आएगा जिसके बाद सिर्फ “हम दो-हमारे दो” ही होंगे तब आपको और आपके फ़ॉलोवर्स को बुरा नहीं लगना चाहिए।

सवाल- रवीश जी आगे लिखते हैं कि “हमारे सहयोगी आलोक पाण्डे ने रिपोर्ट किया है कि सरकार ने लक्ष्य तय किया है कि प्रतिदिन 6 लाख लोगों को वैक्सीन लगेगी। अभी तक कि जो वैक्सीन लगवाने वालों को संख्या है पौने सात लाख। भाजपा यूपी को ब्रांड की तरह पेश नहीं करेगी। नहीं बताएगी कि दुनिया के देशों से बड़े इस प्रदेश में एक दिन में पौने 7 लाख टीके ही क्यों लगे? क्या यह रिकॉर्ड तोड़ कामयाबी है? यूपी में दो प्रतिशत से भी कम को दोनों डोज़ लगे हैं।”

जवाब- यूपी में एक लक्ष्य बनाया गया छः लाख डोज़ प्रतिदिन लगाने का और लगे पौने सात लाख तो यह तो खुशी की बात है कि 75000 टीके एक्स्ट्रा लगाए गए। फिर आप जनसंख्या को टारगेट कर रहे हैं तो आपकी यह मनोकामना जल्द पूरी की जाएगी। बस देखो फिर रोना मत जब जनसंख्या नियंत्रण कानून आए। रही बात दूसरा डोज़ लगने की तो हाँ यहाँ थोड़ी सी देरी है लेकिन सबको पहला डोज़ लगने के बाद दूसरा डोज़ दो महीने बाद लगता है और लगभग दो महीनों से ही आम आदमी तक टीका पहुंचा है। दूसरा डोज़ लग रहा है और जिन्होंने पहला डोज़ लगवाया है उन्हें साथ में ही दूसरे डोज़ की तारीख़ भी मिली है कि कितनी से कितनी तारीख के बीच आप दूसरा डोज़ लगवा सकते हैं।

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इसके बाद रवीश जी यहीं नहीं रुके जिन-जिन राज्यों में भाजपा सरकार है सिर्फ वहीं का नेगेटिव रिव्यु दिया और कल के रिव्यू को पूरी तरह से फ्लॉप बता दिया।

इस फ़ेसबुक पोस्ट के बाद लोगों ने रवीश कुमार को ट्रोल करना शुरू किया।

मोहित लीला ने कमेंट किया कि “रवीश ने न तो गणित पढ़ी, न ही विज्ञान। फार्माकोलॉजी या वैक्सीनेशन की तो हमें सोचना ही नहीं चाहिए। अपनी अल्प बुद्धि और सीमित ज्ञान से ये ऐसी लूली-लंगड़ी कमी ढूंढ पाए इसलिए इनके प्रयासों की प्रशंसा करनी चाहिए।”

राजा कुमार शाह लिखते हैं कि “सर मैं आपका समर्थक था जिस तरह से आपने रोज़गार पर अपने चैनल में अपने शो में मुद्दा बनाया था लेकिन आज के टीका अभियान को आप कृपया फ्लॉप न कहें। आपकी इस पोस्ट को पढ़कर लगता है कि थोड़ा-थोड़ा पगला गए हैं। सरकार की आलोचना करते-करते पोलियो की दो बूंद और कोरोना वैक्सीन के इंजेक्शन की तुलना कर दी। सर इन दोनों में बहुत अंतर है।”

पुरुषोत्तम सिंधी लिखते हैं कि “हो सकता है आपकी बातें तथ्यपूर्ण हो पर आज आपने केवल bjp शासित राज्यो की आलोचना की है। वैसे कई विशेषज्ञ कई दिनों से कह रहे हैं कि भारत को प्रतिदिन 70 लाख से ज्यादा डोज़ लगाने चाहिए।उस हिसाब से आज का काम अच्छा है, हां पर यह बरकरार रहना चाहिए।”

इन कमेंट्स के अलावा भी रवीश कुमार की पोस्ट पर कमेंट्स ही कमेंट्स देखने को मिल रहे थे। कोई पोस्ट को पॉजिटिव कह रहा था तो कोई नेगेटिव। हालांकि अधिकतर लोगों ने रवीश कुमार की इस पोस्ट को गलत ही बताया और उन्हें जमकर ट्रॉल भी किया।

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