भारत में कर्म में विश्वास करने वाले 77% हिंदू हैं, 40% पुनर्जन्म और 73% भाग्य मानते हैं

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bhagwan shiv ke bhakt
Image: Rashtrahit Media

भारत  के धर्मों पर प्यू (Pew) की रिपोर्ट

भारत एक ऐसा देश है जहाँ सभी हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और अन्य धर्म मिलकर रहते हैं| धर्मों में अनेकता होते हुए भी एकता दिखाई देती है| भारत की विशाल जनसंख्या विविध होने के साथ-साथ धर्मनिष्ठ भी है| दुनिया के अधिकांश हिंदू, जैन और सिख के साथ ही भारत में दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी और लाखों ईसाइयों का घर भी है|

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक हिन्दू देवों में सबसे ज्यादा भगवान शिव को माना जाता है| हिंदुओं में 45% लोग भगवान शिव को मानते हैं और तो और भगवान राम से उनके भक्त हनुमान के मानने वाले भी ज्यादा हैं| जहाँ भगवान राम को 17% हिंदू अपना आराध्य मानते हैं तो वहीं हनुमान जी की 32% हिंदू आराधना करते हैं| ऐसा प्यू (PEW) रिसर्च सेंटर के एक सर्वे में बताया गया है|

दरअसल प्यू रिसर्च सेंटर की एक नई रिपोर्ट  “रिलिजन इन इंडिया: टोलरेंस एंड सेग्रीगेशन” जो कि नवंबर 2019 से मार्च 2020 के बीच भारत में सर्वे कर 30,000 लोगों से बातचीत करके 29 जून को जारी की गई थी सर्वे के द्वारा कोविड महामारी से पहले भारतीय समाज में धार्मिक पहचान और राष्ट्रवाद पर करीब से नजर डाली गई थी| सर्वेक्षण करने वालों द्वारा यह सर्वे 17 भाषाओं में किया गया था और इसमें भारत के लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है|

रिपोर्ट के लिए 26 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले 18 वर्ष और उनसे अधिक उम्र वालों से आमने सामने जाकर बात की गई जिनमें 22,975 हिंदू, 3,336 मुसलमान, 1,782 सिख, 1,011 ईसाई, 719 बुद्ध और 109 जैन शामिल हैं| अतिरिक्त 67 लाेग अन्य धर्मों के हैं| इस रिपोर्ट में धर्मों के बारे में हिंदू मान्यताओं के साथ-साथ अन्य दिलचस्प बातें भी निकल कर सामने आई|

रिपोर्ट के निष्कर्ष :

रिपोर्ट के मुताबिक लोगों का यह मानना है कि भारतीय इस विचार मे एकजुट हैं कि अन्य धर्मों का सम्मान करना उनके अपने धार्मिक समुदाय का सदस्य होने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है यानि धर्मों में काफी अंतर होने के बावजूद सब एक दूसरे के धर्मों का सम्मान करते हैं| लेकिन हर एक की मान्यता अपनी है, कहीं मान्यता मिलती हैं तो कहीं नहीं| भारत में कर्म में विश्वास करने वाले 77% हिंदू हैं, ना केवल हिंदू बल्कि इतने ही प्रतिशत के आसपास मुसलमान भी कर्म में विश्वास करते हैं| 32% ईसाई 81% हिंदुओं के साथ कहते हैं कि वह गंगा नदी की शुद्धिकरण शक्ति में विश्वास रखते हैं, जो कि हिंदुओं का मजबूत विश्वास है| बंटवारे के इतने वर्ष बाद भी 48% मुस्लिम बंटवारे को गलत मानते हैं जो उनका देश के प्रति प्रेम दर्शाता है|

वैसे तो यह माना जाता है कि मुसलमानों को पुनर्जन्म पर भरोसा नहीं होता लेकिन सर्वे ने इस बात को गलत साबित कर दिया, सर्वे के मुताबिक 27% मुस्लिम पुनर्जन्म को मानते हैं| हिंदू 77% कर्म 40% पुनर्जन्म और 73% भाग्य मानते हैं| मुस्लिम 77% कर्म, 27% पुनर्जन्म और 63% भाग्य को मानते हैं| सारे धर्मों में बुद्ध और सिख  धर्मों में पुनर्जन्म को सबसे कम माना जाता है| साथ ही बुद्ध धर्म भगवान को भी सबसे कम मानने वाला धर्म है। 43% बुद्ध भगवान को मानते हैं जबकि 33% नहीं मानते।

दो तिहाई जैन और लगभग आधे सिखों का मानना है कि हिंदुओं के साथ उनका बहुत कुछ सामान्य है लेकिन वहीं दूसरी तरफ हिंदू खुद को मुसलमान से बहुत अलग मानते हैं और ज्यादातर मुस्लिम भी यही मानते हैं कि वह हिंदुओं से अलग हैं|

वैसे तो देश में सारे धर्म एक समान हैं लेकिन कुछ मान्यताएं उनमें अंतर पैदा कर देती हैं| अधिकांश भारतीय किसी दूसरी जाति से शादी के संबंध नहीं बनाना चाहते ना ही 80% मुस्लिम अपने घर की बेटियों को किसी और जाति में भेजना चाहते हैं| हाँलाकि सभी भारतीय एक दूसरे के धर्म का सम्मान करते हैं लेकिन सबको पड़ोसी अपने ही धर्म का चाहिए जिसमें 45% हिंदू शामिल है और 61% जैन| सबको लगता है कि वर्ग विभाजन हिंदू में ज्यादा है लेकिन रिपोर्ट ने इस बात को भी गलत साबित कर दिया जिसमें 81% बुद्ध भिन्न जातियों के पाए गए|

72% हिंदू यह मानते हैं कि बीफ यानी गाय का मांस खाने वाले लोग हिंदू ही नहीं है वही 77% मुस्लिम मानते हैं कि पोक खाने वाले लोग मुस्लिम नहीं है| 63% हिंदू ईद मनाने वाले को हिंदू नहीं मानते और 67% मुस्लिम नमाज ना पढ़ने वालों को मुस्लिम नहीं मानते| दूसरी तरफ हिंदू समुदाय के कुछ सदस्य मुस्लिम और ईसाई त्योहार भी मनाते हैं जिनमें से 7% भारतीय हिंदू ईद मनाते हैं और 17% क्रिसमस मनाते हैं|

रिपोर्ट में काफी ऐसी बातें सामने आई हैं जिन पर आपको यकीन करना शायद मुश्किल हो लेकिन यह बातें भारतीय जनता से ही पूछी गई हैं। इन सब समानता और असमानताओं के बाद भी भारत में सभी धर्मों की अपनी पहचान है और सभी अलग-अलग धर्मों का एक साथ रहना भारत की विशेषता रही है। 

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