Intellectuals में बड़े नाम वाले रविश को अब तो कुछ बोल ही देना चाहिए

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photo journalist and ravish

अफगानिस्तान में ड्यूटी के दौरान दानिश सिद्दीकी की हुई हत्या

पुलित्जर पुरस्कार विजेता भारतीय फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की अफगानिस्तान में हत्या कर दी गई। 41 वर्षीय दानिश सिद्दीकी जो भारत में Reuters समाचार एजेंसी के मुख्य फोटोग्राफर थे, उस समय वह एक असाइनमेंट पर काम कर रहे थे जब उनकी हत्या हुई। सिद्दीकी कंधार क्षेत्र में झड़पों को कवर कर रहे थे, जहाँ अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा निर्धारित 11 सितंबर की समय सीमा से पहले ही उन्होंने अफगानिस्तान से अपनी सेना वापस ले ली थी। दानिश ने शुक्रवार को अपने संपादकों को बताया कि स्पिन बोल्डक शहर में अफगान सैनिकों और तालिबान के बीच संघर्ष के दौरान उनके हाथ में छर्रे लगे थे, Reuters के अनुसार उनकी चोट के लिए उनका इलाज किया गया था। एक अफगान कमांडर के हवाले से समाचार एजेंसी ने कहा कि बाद में तालिबान ने फिर से हमला किया। रिपोर्टों के अनुसार सिद्दीकी अफगान बलों के एक काफिले के साथ जुड़े थे, जिस पर तालिबान आतंकवादियों ने घात लगाकर हमला किया।

तालिबान एक कट्टर इस्लामिक मिलीशिया है, जिसने 90 के दशक के मध्य से 2001 के अमेरिकी आक्रमण तक अफगानिस्तान को नियंत्रित किया। इस समूह पर गंभीर मानवाधिकारों और सांस्कृतिक दुर्व्यवहार के कई आरोप लगाए गए हैं, 20 वर्षों के बाद जब विदेशी सैनिकों की वापसी हुई उसके बाद से तालिबान देश भर में तेजी से क्षेत्र पर कब्जा कर रहा है, जिससे अब देश में गृह युद्ध की आशंका बढ़ती जा रही है। तालिबान का यही आतंकवाद दानिश की मौत का भी जिम्मेदार है।

दानिश ने तालिबान के प्रति जताई थी सहानुभूति :

दानिश की हत्या के बाद उनके कई पुराने ट्वीट निकल कर सामने आए जहां वह तालिबान और भारत के कई कट्टर इस्लामी आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते नजर आए। हैरानी की बात तो यह है, की दानिश उसी विचारधारा के शिकार हो गए जिससे वह सहानुभूति रखा करते थे।

दानिश ने एक आतंकवादी इशरत जहां की मौत के प्रति सहानुभूति जताई थी, यहाँ तक कि उन्होंने इशरत समेत बाकी तीन मुसलमानों को बेगुनाह बताते हुए उनकी मौत के जिम्मेदार पुलिस कर्मियों को सजा देने की भी अपने एक ट्वीट में बात की थी और तो और दानिश अफजल गुरु के प्रशंसकों में से भी एक थे, जोकि एक दोषी आतंकवादी है, जिसने 2001 में भारतीय संसद पर हमले में भी भूमिका निभाई थी।

दानिश के पिछले ट्वीट ही दर्शाते हैं कि वह ना केवल एक इस्लामिक आतंकवादी समर्थक थे, बल्कि एक तालिबान आतंकवादी हमदर्द भी थे। वह तालिबान आतंकवादी और सेना के बीच संघर्ष के दौरान मारे गए लेकिन उदारवादियों ने अभी तक तालिबान के आतंक़ की निंदा नहीं की है।

हालाँकि तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने पत्रकार दानिश सिद्दीकी की मौत पर दुःख जताया है। उन्होंने CNN-NEWS18 की खास बातचीत में कहा कि उन्हें दानिश की मौत का बहुत दुःख है साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना में उनकी कोई भूमिका नहीं है, कंधार के स्पिन बोल्डक जिले में हुई झड़पों के दौरान दानिश की मौत हुई। दानिश सिद्दीकी का पार्थिव शरीर शुक्रवार को शाम 5:00 बजे इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) को सौंप दिया गया है।मुजाहिद ने कहा कि उन्हें इस बात का अभी पता नहीं कि किसकी गोलीबारी में पत्रकार की मौत हुई है, उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध क्षेत्र में प्रवेश कर रहे पत्रकार की उन्हें सूचना होनी चाहिए, जिससे वे उस व्यक्ति का खास ध्यान रख सके।

राष्ट्रहित एक पत्रकार की मौत पर श्रद्धांजलि व्यक्त करता है, विचारधारा चाहे कुछ भी हो हम मानते हैं बहुत मुश्किल होता है एक पत्रकार के लिए ऐसी हालातों में काम करना जहाँ युद्ध हो| पत्रकार दानिश की मौत तालिबानी आतंकवाद ने ली है और इस तथ्य को छुपाये बिना हम पत्रकार के परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हैं|

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