शरजील उस्मानी : अब नपेगा

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कोई बीमारी यदि हद से ज्यादा बढ़ने लगे तो उसका इलाज ज़रूरी होता है यदि वक़्त पर इलाज न किया जाए तो वह एक महामारी का रूप ले लेती है। जहाँ एक तरफ़ पूरा देश कोविड से लड़ रहा है वहीं दूसरी तरफ कुछ बुद्धिजीवी सोशल मीडिया साइट्स (फेसबुक, ट्विटर आदि) पर धार्मिक भावनाएं भड़काने में लगे हुए हैं।

कुछ बुद्धिजीवियों के मुताबिक यदि कोई “जय श्री राम” बोलता है तो वह आतंकवादी है इसके अनुसार हिन्दू धर्म का हर व्यक्ति आतंकवादी है परंतु दूसरे धर्म के लोग यदि सोशल मीडिया साइट्स या सोसाइटी में अपनी सोच का कचरा फैलाते हैं तो उन्हें भटके हुए युवाओं का नाम दे दिया जाता है।

कुछ समय पहले कंगना रनौत का ट्विटर एकाउंट ये कहकर हटा दिया गया था कि उन्होंने दंगों की बात की, परंतु देश में अनगिनत शरजील उस्मानी जैसे लोग भी हैं जो सोशल मीडिया साइट्स पर देश/समाज/हिन्दू धर्म के लिए आए दिन ज़हर उगलते रहते हैं। उनपर कोई कार्यवाही क्यों नहीं कि जाती। इन भरोसेवालों पर इतना भरोसा क्यों?

देश मे यति नरसिंहानंद सरस्वती का एक बयान किसी एक धर्म विशेष के खिलाफ आता है तो उसे मारने के लिए एक हत्यारा पाकिस्तान से दिल्ली तक आ जाता है और शरजील उस्मानी जैसे लोग जो दूसरे धर्म विशेष (हिन्दू धर्म) के खिलाफ आए दिन सोशल मीडिया और ज़हर उगलते हैं और “जय श्री राम” बोलने वाले लोगों को आतंकवादी कहते हैं उनका क्या? आख़िर क्यों उनपे नकेल नहीं कसी जाती है। शरजील उस्मानी जैसे लोग देश व समाज के लिए कितने हानिकारक हो सकते हैं वह उसके ट्वीट्स को देखकर समझ जा सकता है।

https://twitter.com/SharjeelUsmani?s=08

आज फ़िलिस्तीन के हमास आतंकवादी संगठन को लाखों लोग सपोर्ट कर रहे हैं, क्या इन्हें सच में नहीं पता कि ये आतंकवाद को सपोर्ट कर रहे हैं।

ज़ेबा आफरीन जोकि AMU की एक लॉ स्टूडेंट हैं उसने एक ट्वीट किया जिसमें उसने भारत को लिंचिस्तान का नाम दिया है और लिखा है कि वह लिंचिस्तान में रहती है परंतु उसका दिल फ़िलिस्तीन में है, जिसे शरजील उस्मानी ने रिट्वीट भी किया।

शरजील उस्मानी के ख़िलाफ़ FIR –

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का पूर्व छात्र शरजील उस्मानी के ख़िलाफ़ दिल्ली के लक्ष्मीनगर थाने में FIR दर्ज की गई। उसपर ट्वीट के जरिए धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप है। इन ट्वीट्स के कारण काफी विवाद हो गया था जिसके बाद भाजपा नेता नवीन कुमार की शिकायत पर शरजील उस्मानी के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई, पुलिस ने IPC की धारा 505 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

कौन है शरजील उस्मानी ?

शरजील उस्मानी उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ का रहने वाला है और उसके पिता तारिक उस्मानी अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर हैं। शरजील AMU में BA की पढ़ाई कर रहा था परंतु उसने पढ़ाई छोड़ दी लेकिन वहां के छात्रों का साथ नहीं छोड़ा।

हिन्दू विरोध विवादों से पुराना नाता-

शरजील आये दिन विवादों के चलते चर्चा में बना रहता है। उसपर अक्सर विवादित बयान देने और विवादित ट्वीट करने के आरोप लगते रहते हैं जिसके कारण उसके ख़िलाफ़ देश के कई थानों में मामले दर्ज हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक शरजील उस्मानी और ताल्हा मन्नान ने दिसम्बर 2019 में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी की बाबरी मस्जिद से जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की और अपमानजक शब्द लिखे। जिसके बाद भाजपा युवा मोर्चा के डिस्ट्रिक्ट स्पोक्सपर्सन प्रतीक चौहान ने शरजील उस्मानी और ताल्हा मन्नान के खिलाफ FIR दर्ज कराई। पुलिस ने IPC की धारा 153A तहत उन दोनों पर मुकदमा दर्ज किया।

• जब AMU में नागरिकता संशोधन कानून CAA के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ तो शरजील उस्मानी उसका प्रमुख चेहरा बन गया। दिसंबर 2019 में CAA का विरोध AMU से तेज हुआ जिसके बाद AMU और JNU से विवादित बयानों का सैलाब आने लगा। 15 दिसंबर 2019 में हुए बवाल में शरजील उस्मानी का नाम मुख्य साजिशकर्ताओं में आया था जिसके चलते थाना सिविल लाइन में चार मुकदमे दर्ज हुए थे।

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• शरजील उस्मानी सीएए के खिलाफ दिल्ली और उत्तर प्रदेश के तमाम शहरों में हुए प्रदर्शन में भी शामिल था। लखनऊ, दिल्ली व अन्य जिलों में सीएए विरोधी प्रदर्शनों में जाकर उसने भाषण दिया था। सीएए के खिलाफ फ्रैटरनिटी मूवमेंट में पदाधिकारी के तौर पर उसका नाम रहा। यूपी एटीएस ने आठ जुलाई 2020 को शरजील उस्मानी को आज़मगढ़ से गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

• अलीगढ़ मामले में सितंबर के महीने में शरजील उस्मानी को कोर्ट से जमानत पर रिहा कर दिया गया था। इसके बाद 4 नवंबर 2020 को यूपी प्रशासन ने शरजील के खिलाफ गुंडा एक्ट में कार्रवाई करते हुए उसे जिला बदर किया था। शरजील ने इसके खिलाफ कमिश्नर की कोर्ट में अपील डाली थी, जो लंबित है। यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि फिर से विवादों में शरजील का नाम आ गया है।

बता दें कि 2017 की तर्ज पर इस साल एक बार फिर महाराष्ट्र के पुणे में बीती 30 जनवरी को एल्गार परिषद का आयोजन किया गया था। इसमें  लेखिका अरुंधती राय, पूर्व आइपीएस एसएम मुशरिफ, मुंबई उच्च न्यायालय के पूर्व जज बीजी कोलसे-पाटिल सहित शरजील उस्मानी जैसे लोग शामिल हुए थे। इस एल्गार परिषद के आयोजन में शरजील उस्मानी ने एक धर्म विशेष पर तीखी टिप्पणियां की थीं, जिसे लेकर महाराष्ट्र की सियासी तपिश बढ़ गई थी।

शरजील उस्मानी पहला या अकेला व्यक्ति नहीं है जो देश/हिन्दू धर्म के लिए ज़हर उगल रहा है और न ही आखिरी होगा, जब तक इस तरह पोस्ट्स पर और इन जैसे लोगों पर नकेल न किसी जाए। वो कहते हैं न कि जब तक कोई बीमारी विक्राल रूप धारण करे उससे पहले उस बीमारी का इलाज ढूंढ लेना चाहिए, वर्ना ये देश को तबाह करने के लिए बड़ी बीमारी बन सकते हैं।

बंगाल के दंगों पर चुप रहने वाले लोग जब फ़िलिस्तीन पर आंसू बहाते हैं तो इनकी मनसा समझते देर नहीं लगती कि इनका उद्देश्य क्या है? इस तरह के लोग भारत के हर कोने में मौजूद हैं, जो दीमक की तरह देश को खोखला करने में लगे हुए हैं।

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