युवाओं की बेकद्री कांग्रेस के पतन का बड़ा कारण है|

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Sachin pilot
Image: Rashtrahit Media

कांग्रेस पार्टी से दिन प्रतिदिन युवा नेताओं का साथ छूटता जा रहा है| देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस को देखकर ऐसा लगने लगा है जैसे पार्टी को युवा नेताओं की कद्र ही नहीं रही है| पार्टी में राहुल गांधी के अलावा केवल तीन-चार नेता ही बचे हैं| इसी के चलते कांग्रेस को एक नयी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है| उत्तर प्रदेश के पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का हाथ थाम कर कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है| विधानसभा चुनाव से पहले इतनी बड़ी हानि सहन करना कांग्रेस के लिए काफी मुश्किल रहेगा|

2016 में कांग्रेस ने असम की राजनीति में तरुण गोगोई की नौटंकियों के कारण हेमंता बिस्वा सरमा जैसा नेता को खो दिया था और आज वो बीजेपी की तरफ से असम राज्य के मुख्यमंत्री हैं। इसी तरह जितिन प्रसाद भी पार्टी छोड़ क बीजेपी की तरफ हो गये हैं| इसका बड़ा कारण यह भी है कि दिल्ली में मुख्य तौर पर बुजुर्ग नेता बैठे हैं, जो कि युवाओं की ज्यादा कद्र नहीं करते| पिछले तीन-चार सालों से जितिन प्रसाद की पार्टी में अवहेलना की जा रही थी तभी उन्होंने पार्टी छोड़ दी|

इतने युवाओ के पार्टी छोड़ने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है| सचिन पायलट पिछले 2 सालों से लगातार पार्टी से अपने हितों को पूरा करने की बात कर रहे हैं, लेकिन नतीजा इतना खास नहीं रहा| इतना सब होने के बाद पार्टी गिरने की स्थिति हो रही है|

हेमंता, सिंधिया, जितिन प्रसाद, और अब पायलट के बगावती तेवर :

कांग्रेस पार्टी द्वारा युवा नेताओं को ज्यादा तवज्जो न देने के कारण हेमंता विश्वसर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, और अब सचिन पायलट के साथी बगावत पर उतर आये हैं| ये बगावत दर्शाती है कि सारे नेता कांग्रेस पार्टी से कितना असंतुष्ट हैं| राहुल ने अपने युवा नेता हेमंता से ज्यादा ध्यान अपने कुत्ते पिडी पर लगाए रखा और देखते ही देखते हेमंता ने भी पार्टी छोड़ दी। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए अब कांग्रेस को अपने मंत्रियों पर ध्यान देना चाहिए|

अशोक गहलोत ने नेताओं की समय सारिणी का ब्यौरा माँगा है:

CM अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच तीखी नोक-झोंक के चलते अब सीएम अशोक गहलोत  ने विधायकों और मंत्रियों की निगरानी शुरू कर दी है| जिससे आगे उन्हें किसी बगाबत का सामना न करना पड़े|सूत्रों के मुताबिक गहलोत ने मंत्रियों के पीए को हर सुबह 11 बजे मंत्रियों और विधायकों के मूवमेंट की जानकारी देने के लिए कहा गया है। उन्हें मुख्य रूप से यह जानकारी देने के लिए कहा गया है कि मंत्री जयपुर में हैं भी या नहीं|

सचिन पायलट की बगाबत के बाद अशोक गहलोत ने उनके नेताओं पर ध्यान देना शुरू किया है| वो अपनी पार्टी को बनाये रखने का प्रयास कर रहे हैं|

जुलाई 2020 में भी ऐसी ही राजनीतिक रस्सा कसी देखने को मिली थी:

2020 में भी कांग्रेस पर संकट के बदल मंडराए थे| पिछली साल जुलाई 2020 में भी कुछ यूँ ही स्थिति बनी थी कि सचिन पायलट बागी तेवर अपना चुके थे और बीजेपी के साथ सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ते दिखाई दिए| जिसके लिए उन्हें कम से कम  30 विधायकों को अपने साथ लाना था| मीडिया रिपोर्ट्स में 30 विधायक होने का दावा भी किया जा रहा था| कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सचिन पायलट के साथ कांग्रेस के करीब 20 विधायक होने का भी दावा किया जा रहा था| किसी तरह मतभेद शांत हो गया| इस बात को अभी साल भी नहीं हुआ कि सचिन ने एक बार फिर अपना रुख बदलने का संकेत दिया है और फिर से यह राजनीतिक रस्सा-कस्सी शुरू हो गई है| उसके बाद एक बार फिर पार्टी मुश्किल में है।

और पढें : सचिन पायलट , दिक्कत कहाँ है ?

देर शाम फिर सियासत ने करवट ली :

राजस्थान की राजनीति जिस तरह हिचकोले ले रही है उसे समझने में बड़े-बड़े राजनीतिक पंडित भी नाकाम दिखाई दे रहे हैं, शुक्रवार शाम को ही सचिन ने भाजपा की तरफ बह रही हवा को काटने का एक सन्देश दे दिया जब वह भाजपा पर महंगाई को लेकर धावा बोलते नज़र आए|

अपनी फेसबुक वॉल पर सचिन लिखते हैं :

sachin-pilot

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार आज जयपुर में पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस की बढ़ती कीमतों व महंगाई को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन में सम्मिलित होकर बढ़ती महंगाई के खिलाफ आमजन की आवाज को बुलंद किया।इस कोरोना काल में भी केंद्र की भाजपा सरकार पेट्रोल-डीजल के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि करके आर्थिक तंगी से जूझ रही जनता पर महंगाई का अनावश्यक बोझ डालकर आमजन का शोषण कर रही है।

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