तो इसलिए नहीं दे रही है सरकार PM केयर फंड का हिसाब…!

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पिछले कुछ महीनों से PM केयर फंड का नाम चर्चाओं में होकर भी चर्चा का विषय नहीं बन पाया है .

आखिर है क्या पीएम केयर फंड ?

लॉकडाउन की शुरुआत से पहले एक राहत कोष बनाया गया था जिसका नाम रखा गया पीएम केयर फंड , (सोशल मीडिया ने तो इसकी भी चुटकी ले ली कि ये पीएम की केयर के लिए बनाया गया है ) , तो पीएम केयर फंड में हमारे देश के पूंजीपतियों से लेकर गरीब ने तक अपने हिसाब और इच्छा से दिल खोल कर सहयोग किया , जिसमें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ तमिल , तेलगू भाषी फ़िल्मी उद्योगों ने भी करोड़ों के हिसाब से दान किया। और तो और भाजपा शाषित राज्यों में तो बूथ स्तर पर निम्न भाजपा नेताओं को टास्क तक दिया गया था कि इतना रुपया जमा करवाना है |

चर्चाओं में क्यों आया ?

ये केयर फंड चर्चाओं में इसलिए भी आगया कि सरकार ने इसे RTI एक्ट 2005 के तहत पब्लिक अथॉरिटी नहीं माना। मतलब कि अब सरकार इस फंड का हिसाब आरटीआई के तहत भी किसी को नहीं देगी। तो लोगों ने अदालत का रास्ता निकाला और पहुँच गए बॉम्बे हाई कोर्ट।

कोर्ट में क्या हुआ ?

वकील अरविंद बाघमारे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी PM केयर फंड के लिए बनाये गए ट्रस्ट के चेयरपर्सन हैं और तीन बड़े मंत्री (गृह , वित्त और रक्षा मंत्री ) इसके सदस्य हैं। यह फंड कोरोना के चलते हुई नुकसान की भरपाई में मददगार साबित होने के लिए बनाया गया था . (पर मददगार कैसे साबित हो रहा है सरकार इसका जवाब नहीं दे रही है)

वकील अरविंद बाघमारे ने कहा कि सरकार इस केयर फंड का हिसाब वेबसाइट पर उपलब्ध कराये जिससे लोग इसको देख सकें। और साथ ही PM केयर फंड की जाँच भी की जा सके। जाँच का जिम्मा CAG को दिया जाए और फंड के लिए बनाए गए ट्रस्ट में 2 सदस्य विपक्षी दलों से भी जोड़ें जाएं।

इस पर सरकार ने क्या कहा ?

भारत सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह आए और उन्होंने इस याचिका का विरोध किया और कहा कि अप्रैल महीने में भी ऐसी एक याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था।

जज बोले कि…

जस्टिस एसबी शुक्रे और जस्टिस ए एस किलोर की बेंच ने सरकार की इस दलील को नहीं माना और आदेश दिया कि सरकार 2 सप्ताह के अंदर अपना पक्ष लिखते हुए एक एफिडेविट दाखिल करे.

तो सवाल तो हैं कि

  • सरकार जब जनता की ही केयर कर रही है तो जनता से ही छुपाने की क्या जरूरत ? (जबकि चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी खुद कहा करते थे कि आप मुझसे हिसाब माँग सकते हैं।)
  • सवाल ये भी है कि नया केयर फंड बनाने की क्या जरूरत आन पड़ी ?
  • सवाल विपक्ष से भी हैं जनता की सेवा करने का ढिंढोरा पीटने से पहले यह तो सुनिश्चित करलें कि क्या उनका संसदीय क्षेत्र कोरोना से लड़ने के लिए तैयार है ?

तुम पढ़े लिखों से तो अच्छे हम जानवर सही …!

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